2026 के दिसंबर तक 107000 तक पहुंच जाएगा सेंसेक्स, खरीदने का सबसे बेहतर समय! इस नई रिपोर्ट में दावा

तरुण प्रताप सिंह, लाइव हिन्दुस्तान के साथ अक्टूबर 2020 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस टीम का हिस्सा हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर पर लिखने के साथ-साथ आईपीओ पर वीडियो इंटरव्यू की भी जिम्मेदारी सम्भालते हैं। लाइव हिन्दुस्तान की वीडियो टीम के लिए 2022 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में टीम लीड करते हुए 200 विधानसभा सीट में ग्राउंड रिपोर्टिंग, इंटरव्यू और स्पेशल स्टोरीज कर चुके हैं। श्री राम जन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा समारोह, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उत्तर प्रदेश में ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है। साल 2025 में प्रयागराज में सम्पन्न हुए महाकुंभ में 40 दिन से अधिक दिन तक कुंभ नगरी में रहकर अनेकों वीडियो इंटरव्यू और स्पेशल स्टोरिज किए थे।शिक्षाबी.ए (ऑनर्स) और एम.ए की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी से पूरा किया है। भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है।अनुभव -HT का हिस्सा बनने से पहले स्वतंत्र तौर पर 2019 में लोकसभा चुनाव, 2019 में हरियाणा विधानसभा, 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव और 2020 में दिल्ली दंगा की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव प्राप्त है। श्री राम मंदिर भूमि पूजन (साल 2020) के दौरान भी बतौर स्वतंत्र पत्रकार अपनी सेवाएं दिए हैं।दैनिक जागरण के एक स्पेशल कार्यक्रम के तहत वाराणसी में दो अलग-अलग साल में 100-100 बच्चों को संसदीय कार्यप्रणाली की 15 दिनों की ट्रेनिंग भी देने का अनुभव प्राप्त है।विशेषताएं -वीडियो रिपोर्टिंग में दक्षता हासिल है। कई इंटरव्यू और ग्राउंड ओपनियन वीडियो नेशनल लेवल पर विमर्श का केंद्र बने हैं। बिजनेस और राजनीति के अलावा क्रिकेट, धर्म और साहित्य पर लिखना-पढ़ना पसंद है।और पढ़ें

Source:NDTV

March 04, 2026 11:56 UTC


Holi 2026: एशियाड खेलों में धाक जमाने वाली बाड़मेर की 185 साल पुरानी 'गैर' का जादू, आंगी-बांगी पहन एक साथ थिरकीं तीन पीढ़ियां

Gair Dance in Barmer: रेगिस्तानी जिले बाड़मेर के सनावड़ा गांव में धुलंडी के अवसर पर लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला. जहां हजारों दर्शकों से इस इस नृत्य में शामिल होने के लिए दूर - दराज के इलाकों से आते है. साथ ही ढोल-नगाड़ों की गूंज, थालियों की खनक और गैरियों के समूह नृत्य में खो जाते हैं. महिलाओं की सुरक्षा के लिए हुई थी इसकी शुरूआतगैर नृ्त्य की सदियों पुरानी परंपरा को लेकर इतिहासकारों और बुजुर्गों का कहना है कि यह नृत्य करीब 185 वर्ष पुराना है.इसकी शुरूआत महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी थी. बाद में डंडों को लय में शामिल कर यह नृत्य गैर के रूप में विकसित हुआ.

Source:NDTV

March 04, 2026 11:48 UTC


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