Gair Dance in Barmer: रेगिस्तानी जिले बाड़मेर के सनावड़ा गांव में धुलंडी के अवसर पर लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला. जहां हजारों दर्शकों से इस इस नृत्य में शामिल होने के लिए दूर - दराज के इलाकों से आते है. साथ ही ढोल-नगाड़ों की गूंज, थालियों की खनक और गैरियों के समूह नृत्य में खो जाते हैं. महिलाओं की सुरक्षा के लिए हुई थी इसकी शुरूआतगैर नृ्त्य की सदियों पुरानी परंपरा को लेकर इतिहासकारों और बुजुर्गों का कहना है कि यह नृत्य करीब 185 वर्ष पुराना है.इसकी शुरूआत महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी थी. बाद में डंडों को लय में शामिल कर यह नृत्य गैर के रूप में विकसित हुआ.
Source: NDTV March 04, 2026 11:48 UTC