दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर और कई राज्‍यों के राज्‍यपाल रहे वेद मारवाह का निधन

दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर और कई राज्‍यों के राज्‍यपाल रहे वेद मारवाह का निधननई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त वेद मारवाह का शुक्रवार रात आठ बजे गोवा में निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उनका जन्म पेशावर में हुआ था। वह मणिपुर, झारखंड और मिजोरम के राज्यपाल भी रह चुके थे। जानकारी के अलुसार उन्होंने गोवा के मापुसा के असिलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके पिता विभाजन के बाद भारत आ गए थे। भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी मारवाह ने अपने 36 साल के करियर में विभिन्न राज्यों में काम किया।1985 से 1988 तक दिल्ली पुलिस के आयुक्त रहे। उनके साथ काम करने वाले अधिकारियों के मुताबिक वे एक सख्त अधिकारी और नर्म दिल इंसान थे। उन्होंने तीन राज्यों में राज्यपाल के रूप में भी सेवा दी। वेद मारवाह 1999 से 2000 तक मणिपुर, 2000 से 2001 तक मिजोरम और 2003 से 2004 तक झारखंड के राज्यपाल रहे।चुनौतियों के समय पुलिस बल का नेतृत्व कियावेद मारवाह ने 1988 से 1990 के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के तीसरे महानिदेशक के तौर पर भी सेवाएं दीं। मारवाह के निधन पर गोवा डीजीपी ने ट्वीट किया कि हम पुलिस फोर्स के महान नेता के चले जाने से अत्यंत दुखी हैं। वेद मारवाह ने चुनौतियों के समय पुलिस बल का नेतृत्व किया और तीन राज्यों के राज्यपाल के रूप में सेवाएं दीं। हमारी प्रार्थना और संवेदना उनके परिवार के साथ है।पूर्व चुनाव आयुक्‍त एसवाई कुरैशी ने भी वेद मारवाह के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने कहा कि मैं वेद मारवाह के निधन से दुखी हूं। कभी वह जेएस वुमंस डेवलमपेंट्स में मेरे बॉस हुआ करते थे। सेंट स्टीफंस कॉलेज में वह अध्यक्ष थे और मैं उपाध्यक्ष था। उनकी आत्मा को शांति मिले।Posted By: Arun Kumar Singhडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

June 05, 2020 20:48 UTC


5 साल पहले पीएम मोदी ने मनरेगा योजना का मजाक उड़ाया था, लॉकडाउन के दौरान इसी ने 2.63 करोड़ गरीब परिवारों को रोजगार दिया - Dainik Bhaskar

देश के ग्रामीण इलाकों में 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने वाली यह योजना यूपीए सरकार के समय अगस्त 2005 में आई थीलॉकडाउन के दौरान भी इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में काम चलता रहा, इस बीच 2.63 करोड़ परिवारों को औसतन 17 दिन काम मिलाभाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश में यह योजना 40 करोड़ परिवारों का सहारा बनी, इन परिवारों को पिछले 2 महीने में औसतन 15 दिन रोजगार मिलादैनिक भास्कर Jun 06, 2020, 05:51 AM ISTनई दिल्ली. तारीख: 27 फरवरी 2015... दिन: शुक्रवार। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण पर हो रही चर्चा का जवाब दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपीए सरकार के समय साल 2005 में आई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पर एक टिप्पणी की थी।मोदी ने कहा था, "मेरी राजनैतिक सूझबूझ कहती है, मनरेगा कभी बंद मत करो.. मैं ऐसी गलती कभी नहीं कर सकता, क्योंकि मनरेगा आपकी (यूपीए) विफलताओं का जीता-जागता स्मारक है.. आजादी के 60 साल बाद आपको लोगों को गड्ढे खोदने के लिए भेजना पड़ा.. यह आपकी विफलताओं का स्मारक है, और मैं गाजे-बाजे के साथ इस स्मारक का ढोल पीटता रहूंगा... दुनिया को बताऊंगा, ये गड्ढे जो तुम खोद रहे हो, ये 60 सालों के पापों का परिणाम हैं।”प्रधानमंत्री मोदी जब यह बोल रहे थे, तब सदन में जमकर ठहाके लग रहे थे। उनकी यह टिप्पणी यूपीए की इस योजना का मखौल उड़ाती नजर आ रही थी। लेकिन लॉकडाउन के दो महीने जब देशभर में मजदूर वर्ग बेरोजगार होकर पलायन कर रहा था, तब यही एक योजना थी, जिसने ग्रामीण इलाके में मजदूरों को ज्यादा परेशान नहीं होने दिया। लॉकडाउन के शुरुआती 2 महीनों में देश के ग्रामीण इलाकों में 2.63 करोड़ परिवारों को इस योजना का लाभ मिलता रहा। हर परिवार को लॉकडाउन के 60 दिनों में से 17 दिन काम मिला, जो इनके खाने-पीने और जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त था।2020-21 के मार्च और अप्रैल महीने में मनरेगा के तहत मिले रोजगार की तुलना पिछले साल से की जाए तो ज्यादा अंतर नजर नहीं आता। वित्त वर्ष 2019-20 में 5.48 करोड़ परिवारों को इस योजना के तहत सालभर में औसत 48 दिन का काम मिला था। इस हिसाब से इस वित्त वर्ष के 2 महीनों का आंकड़ा ठीक-ठाक ही कहा जाएगा।मनरेगा से सबसे ज्यादा फायदे में रहा भाजपा शासित राज्य उत्तरप्रदेशभाजपा शासित राज्य हो या गैर भाजपा शासित राज्य, हर राज्य में लॉकडाउन के दौरान यह योजना लाखों गरीब परिवारों का सहारा बनी। उत्तर प्रदेश को इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ मिला। यहां लॉकडाउन के दौरान 40 करोड़ परिवारों को मनरेगा ने रोजगार दिए। यहां 1091 करोड़ रुपए सिर्फ मजदूरों को मिलने वाले मेहनताने पर खर्च हुए। लॉकडाउन के दौरान ही यूपी में मनरेगा के तहत 43 हजार से ज्यादा काम भी पूरे हुए।मोदी सरकार भी मनरेगा के सहारे; केन्द्र ने 20 दिन पहले ही इस योजना को 40 हजार करोड़ अतिरिक्त दिएइस साल बजट में मनरेगा पर 61,500 करोड़ का प्रावधान किया गया था। लेकिन 17 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मनरेगा को 40 हजार करोड़ अतिरिक्त देने की बात कही। यानी मनरेगा के बजट को सीधे-सीधे 65% बढ़ा दिया गया। यह इसलिए क्योंकि लॉकडाउन के दौरान ग्रामीण इलाकों में यही एक योजना थी, जो लोगों को रोजगार दे रही थी। और फिर शहर से गांव वापस लौटे वे मजदूर, जिनके पास अब कोई काम नहीं बचा, उनके लिए भी सरकार को रोजगार का कोई न कोई बंदोबस्त तो करना ही था। ऐसे में मनरेगा पर बजट बढ़ाना ही सरकार के पास सबसे बेहतर विकल्प था।पिछले साल केन्द्रीय कृषि मंत्री ने मनरेगा को जल्द ही बंद करने की बात कही थीपिछले साल जुलाई में केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा को बताया था कि मोदी सरकार मनरेगा को ज्यादा दिनों तक चलाने के पक्ष में नहीं है। तोमर ने कहा था, “यह योजना गरीबों के हित के लिए है, जबकि सरकार का अंतिम लक्ष्य गरीबी खत्म करना है। ऐसे में गरीबी मिटाने के बाद सरकार मनरेगा को खत्म कर देगी।”कृषि मंत्री ने यह बयान तो दिया था लेकिन मोदी सरकार के पिछले 4 सालों को ही देख लें तो लगातार इस योजना पर केन्द्र सरकार ने बजट बढ़ाया ही है। 2017-18 में यह 48 हजार करोड़ था, जो 2018-19 में 55 हजार करोड़ हुआ। 2019-20 में मनरेगा के लिए 60 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया, वहीं 2020-21 के लिए यह राशि 61 हजार 500 कर दी गई। बहरहाल, 17 मई के बाद 2020-21 के लिए मनरेगा का बजट 1 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुका है।क्या है मनरेगा योजना? मनरेगा योजना यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान लाई गई थी। 23 अगस्त 2005 को इस योजना का बिल संसद से पास हुआ और 2 फरवरी 2006 से यह योजना 200 पिछड़े जिलों में लागू कर दी गई। फिलहाल यह देश के 644 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है। इस योजना का मकसद एक वित्त वर्ष के 365 दिनों में से ग्रामीण इलाकों के परिवारों को 100 दिन तक रोजगार उपलब्ध कराना है।

June 05, 2020 20:37 UTC


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