Vodafone m-pesa का लाइसेंस RBI ने किया रद, कंपनी ने स्‍वेच्‍छा से किया सरेंडर

मुंबई, पीटीआइ। भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को कहा कि इसने Vodafone m-pesa का सर्टिफिकेट ऑफ अथॉराइजेशन (CoA) रद कर दिया है। RBI ने कहा कि कंपनी ने स्‍वेच्‍छा से अथॉराइजेशन सरेंडर किया है। CoA रद होने के बाद वोडाफोन अपने m-pesa कारोबार को जारी नहीं रख सकती। भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि कंपनी के इस प्रीपेड पेमेंट इंस्‍ट्रूमेंट का परिचालन बंद हो जाएगा। हालांकि, ग्राहक और मर्चेंट पेमेंट सिस्‍टम ऑपरेटर (PSO) के तौर पर दावा कर सकते हैं। PSO अपने दावे के निपटान के लिए अथॉराइजेशन रद होने की तारीख से तीन साल के भीतर यानी 30 सितंबर 2022 तक वोडाफोन से अपने दावों के निपटान के लिए कह सकते हैं।RBI ने कहा कि वोडाफोन m-pesa भुगतान प्रणाली ऑपरेटर (PSO) ने स्वेच्छा से प्राधिकरण के सामने समर्पण कर दिया था। पिछले साल वोडाफोन आइडिया ने आदित्य बिड़ला आइडिया पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (ABIPBL) के बंद होने के बाद m-pesa वर्टिकल को बंद करने का फैसला किया था, जिसके साथ इसका विलय किया जा रहा था। वोडाफोन m-pesa उन 11 फर्मों में से एक थी जिन्हें 2015 में RBI द्वारा भुगतान बैंक लाइसेंस दिया गया था।Posted By: Niteshडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

January 21, 2020 11:26 UTC


Union Budget 2020: अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बजट में Income Tax में हो कटौती, कृषि से जुड़े हों सुधार

इंडिविजुअल्स के लिए टैक्स में छूट2. घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए कुछ सेक्टर्स में आयात शुल्क में बदलाव4. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और कृषि से जुड़े सुधार6. टैक्स प्रक्रिया की कमियों को दूर करने के उपाय9. फाइनेंशियल सेक्टर और एमएसएमई को मजबूत करने के उपाययह आम बजट ऐसे समय में पेश होने जा रहा है, जब अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की बड़ी आवश्यकता है। हम उम्मीद करते हैं कि वित्त मंत्री राजकोषीय स्थिति, अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और निवेशकों व उद्योगों के हितों को लेकर एक बैलेंस बनाने में कामयाब होंगी।(लेखक टॉरस म्‍युचुअल फंड के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैंं।)Posted By: Pawan Jayaswalडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

January 21, 2020 11:23 UTC


जीडीपी / ग्लोबल ग्रोथ को लेकर दुनियाभर के सीईओ की निराशा चरम पर, 53% ने कहा- विकास दर घटेगी

कंसल्टेंसी फर्म पीडब्ल्यूसी का सर्वे; 35% सीईओ व्यापार विवाद को ग्रोथ के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैंभारत के 52% सीईओ ने ग्लोबल ग्रोथ घटने की बात कही, 17% ने स्थिर रहने की उम्मीद जताईसिर्फ 27% सीईओ को उनकी कंपनियों का रेवेन्यू बढ़ने का भरोसा, यह 2009 के बाद सबसे कमDainik Bhaskar Jan 21, 2020, 04:54 PM ISTदावोस. दुनिया भर के सीईओ के मन में ग्लोबल जीडीपी ग्रोथ को लेकर निराशा चरम पर है। ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म पीडब्ल्यूसी के सर्वे के मुताबिक, पहली बार 53% सीईओ ने ग्रोथ में गिरावट की बात कही है। पिछले साल ऐसा कहने वाले सिर्फ 29% थे। इस साल सर्वे में 83 देशों के 1,581 सीईओ शामिल किए गए। इनमें से सिर्फ 22% ने ग्रोथ बढ़ने की उम्मीद जताई। पिछले साल ऐसे सीईओ की संख्या 42% थी। स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की शुरुआत के एक दिन पहले सोमवार को यह सर्वे जारी किया गया।ग्लोबल जीडीपी ग्रोथ को लेकर सीईओ का भरोसा 2018 में सबसे ज्यादा 57% थाप्रमुख अर्थव्यवस्था वाले देशों में सिर्फ चीन के सीईओ के भरोसे में पिछले साल के मुकाबले इजाफा हुआ है। उन्हें लगता है कि इस साल उनकी कंपनियों का रेवेन्यू बढ़ेगा। सर्वे में शामिल भारतीय सीईओ में से 52% का कहना है कि दुनिया की जीडीपी ग्रोथ घटेगी। ग्लोबल जीडीपी को लेकर 2018 में सीईओ का भरोसा सबसे ज्यादा था। उस वक्त दुनिया के 57% सीईओ ने विकास दर में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई थी।भारत के सिर्फ 40% सीईओ को कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ बढ़ने का भरोसा

January 21, 2020 11:14 UTC


एक बार फिर बदली अमिताभ बच्चन की फ़िल्म 'चेहरे' की रिलीज़ डेट, जानिए पूरा मामला

एक बार फिर बदली अमिताभ बच्चन की फ़िल्म 'चेहरे' की रिलीज़ डेट, जानिए पूरा मामलानई दिल्ली, जेएनएन। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन उम्र के इस पड़ाव पर भी एक के बाद एक फ़िल्में करने में व्यस्त हैं। इन्हीं आने वाली फ़िल्मों से एक 'चेहरे' की रिलीज़ डेट एक बार फिर बदल दी गई है। यह दूसरी बार है, जब अमिताभ और इमरान हाशमी स्टारर फ़िल्म 'चेहरे' की रिलीज़ डेट बदली गई हो। इसे पहले 24 अप्रैल को रिलीज़ किया जाना था, लेकिन अब यह 17 जुलाई 2020 को रिलीज़ होगी।इससे पहले भी चेहरे की रिलीज़ डेट में बदलाव किया गया था। पहले फ़िल्म 21 फरवरी को रिलीज़ होनी थी। इसके बाद रिलीज़ डेट आगे बढ़ा कर 24 अप्रैल कर दी गयी। इसके बाद इसे बदलकर 17 जुलाई कर दिया गया। इसके पीछे एक वजह है। आइए जानते हैं...गुलाबो-सिताबो के मेकर्स की अपीलअमिताभ की फ़िल्म की रिलीज़ डेट बदलने के पीछे उनकी दूसरी फ़िल्म 'गुलाबो-सिताबो' के मेकर्स हैं। उन्होंने इस डेट को बदलने की अपील की है। वे चाहते हैं कि फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस पर आपस में ना टक्कराएं। 'गुलाबो-सिताबो' फरवरी में रिलीज़ होने वाली है। 'गुलाबो-सिताबो' को शूजित सरकार डायरेक्ट कर रहे हैं। शूजित इससे पहले अमिताभ बच्चन के साथ पीकू बना चुके हैं। पीकू अपने समय की कॉमर्शियल हिट रही है।इमरान हाशमी के साथ शेयर करेंगे स्क्रीनचेहरे ऐसी पहली फ़िल्म है, जिसमें इमरान हाशमी और अमिताभ बच्चन एक साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। यह एक मिस्ट्री थ्रिलर फ़िल्म है। अमिताभ के कई अलग-अलग लुक वाली तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। फ़िल्म में अमिताभ बच्चन एक बार फिर वकील की भूमिका में नजर आएंगे। इससे पहले वह हाल ही आई 'बदला' में भी वकील का किरदार निभा चुके हैं। वहीं, इमरान हाशमी बिजनेस मैन के किरदार में दिखने वाले हैं। फ़िल्म को लेकर अमिताभ के फैंस का उत्साह बढ़ गया है। हालांकि, इस फ़िल्म को लेकर अमिताभ के फैंस को अब और इंतज़ार करना पड़ेगा।(Inputs- ANI and IANS)Posted By: Rajat Singhडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

January 21, 2020 10:35 UTC


प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता की एक कंपनी की 107 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में कोलकाता की एक कंपनी की 107 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है. ईडी ने मंगलवार को बताया कि यह कुर्की मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत की गयी है. ईडी ने बताया कि यह कार्रवाई कोलकाता की फेयर डील सप्लायर्स के निदेशकों के खिलाफ की गयी. इसमें कंपनी की कोयंबटूर की भूमि और इमारत, अहमदाबाद में एक कार्यालय इमारत, एक फार्म हाउस, बंगला और सात सावधि जमा खातों को कुर्क किया गया है. सीबीआई के आरोप पत्र का अध्ययन करने के बाद ही ईडी ने इनके खिलाफ मामला दर्ज किया है.

Source:NDTV

January 21, 2020 10:30 UTC


..तो 2022 तक पूरा हो सकता है ऊर्जा का 'अक्षय सपना'

..तो 2022 तक पूरा हो सकता है ऊर्जा का 'अक्षय सपना'नई दिल्ली, एजेंसी। ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए तय किए अपने लक्ष्यों के तहत केंद्र सरकार ने 2022 के लिए ऊर्जा का अक्षय सपना 2015 में देखा। इस दिशा में तेजी से काम भी शुरू हुए। अब सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी की रिसर्च बताती है कि सरकार के अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कुल जमीन फुटप्रिंट 55 हजार से 1.25 लाख वर्ग किमी की दरकार होगी। यह रकबा देश के छत्तीसगढ़ या हिमाचल प्रदेश के बराबर है। बता दें कि 175 गीगावाट- 2022 तक अक्षय ऊर्जा पैदा करने का सरकार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है।चिंता की बातरिपोर्ट के मुताबिक अगर तय लक्ष्य को हासिल करने के लिए एकसूत्री कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ा गया तो इसके कई नकारात्मक असर दिखाई दे सकते हैं। औसतन 6,700 से 11,900 वर्ग फीट जंगल और 24,100 से 55,700 वर्ग फीट कृषि योग्य भूमि इससे अलग-अलग स्तरों पर प्रभावित हो सकती हैं। इस नुकसान से पर्यावरणीय और सामाजिक टकराव शुरू हो सकते हैं। लिहाजा निवेश पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर अक्षय ऊर्जा पैदा करने के लक्ष्य को पाना मुश्किल हो सकता है।क्या है समाधानरिपोर्ट के अनुसार भारत के 32.90 करोड़ हेक्टेयर रकबे में से 27 फीसद बेकार भूमि है। जो इस लक्ष्य को पाने के लिए पर्याप्त है।उठाए गए प्रभावी कदमअक्षय ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार का सबसे चर्चित कदम टैक्स हॉलिडे रहा। इसमें सरकार ने राज्यों के स्तर पर अक्षय ऊर्जा की खरीद को अनिवार्य बनाने से लेकर 10 साल के टैक्स हॉलिडे के जरिए आर्थिक प्रोत्साहन देने का प्रयास किया।कुदरत की मेहरबानीधूप वाले 300 दिनों के साथ भारत सूरज की सर्वाधिक रोशनी वाले देशों में प्रमुख है जबकि पवन ऊर्जा का निर्माण भी पूरे देश में कहीं भी संभव है।पांचवां अक्षय ऊर्जा उत्पादक देशभारत अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा अक्षय ऊर्जा उत्पादक देश है। साथ ही विश्व का चौथा सबसे बड़ा पवन ऊर्जा क्षमता और पांचवां सबसे बड़ा सौर क्षमता वाला देश बन चुका है। 2015 के पेरिस जलवायु समझौते में भारत ने 2022 तक 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का दावा किया है इसलिए 2014-15 और 2017-18 के बीच अक्षय ऊर्जा के बजटीय आवंटन में 38.9 प्रतिशत की वृद्धि भी की गई। 2010-11 में राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण निधि का गठन किया गया था।ऐसा होगा विभाजन2022 तक 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का जो लक्ष्य रखा है, इसमें 100 गीगावाट सौर, 60 गीगावाट पवन, 10 गीगावाट बॉयो पावर और 5 गीगावाट छोटे हाइड्रो पावर का रहेगा।महत्वपूर्ण तथ्य:- अक्षय ऊर्जा भारत की ऊर्जा योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 1970 में ही इसकी टिकाऊ ऊर्जा के रूप में पहचान कर ली गई थी।- देश में ऊर्जा उत्पादन की स्थापित क्षमता 310 गीगावाट है। इसमें 69.4 फीसद तापीय, 13.9 जलविद्युत, 14.8 अक्षय और 1.9 फीसद परमाणु ऊर्जा है।- आधुनिक समय में इसका इस्तेमाल बिजली पैदा करने, गर्म व ठंडा करने के उपयोगों में, परिवहन और गांवों में ग्रिड से बाहर ऊर्जा सेवाएं देने में हो रहा है।- देश में 12 लाख से ज्यादा घरों में रोशनी के लिए सोलर ऊर्जा का उपयोग हो रहा है। इतने ही घरों में खाना पकाने के लिए बॉयो गैस प्लांट का इस्तेमाल हो रहा है। सोलर फोटोवोल्टिक पावर सिस्टम ग्रामीण विद्युतीकरण, रेलवे सिग्नलिंग, मोबाइल टावर, टीवी ट्रांसमिशन और सीमा चौकियों पर बिजली मुहैया कराने में इस्तेमाल हो रहे हैं।Posted By: Nitin Aroraडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

January 21, 2020 10:30 UTC


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