ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत के बाद पाकिस्तान के कराची में भारी हिंसा, अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को लगाई आग, 8 की मौत

लेखक के बारे में अभिजात शेखर आजाद अभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं।अभिजात ने अपने करियर में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) के भू-राजनीतिक संकटों का सूक्ष्म विश्लेषण किया है। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं।प्रमुख उपलब्धियां और विशेषज्ञता:रक्षा और सैन्य विश्लेषण: राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।चुनाव कवरेज: कई भारतीय लोकसभा चुनावों और प्रमुख वैश्विक चुनावों की ग्राउंड और संपादकीय रिपोर्टिंग।पुरस्कार: पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए दो बार प्रतिष्ठित ENBA अवार्ड से सम्मानित।इंटरव्यू: वैश्विक नीति निर्माताओं, पूर्व राजनयिकों और रक्षा विशेषज्ञों के साथ विशेष संवाद।अभिजात का लक्ष्य वैश्विक घटनाओं के पीछे छिपे 'असली कारणों' को उजागर करना है, ताकि पाठक केवल खबर न पढ़ें, बल्कि उसके दूरगामी प्रभावों को भी समझ सकें।... और पढ़ें

March 01, 2026 08:50 UTC


बच्चों के लिए कम बन रही फिल्मों पर निर्देशक रवि उदयवार ने जताई चिंता, कहा- 'विदेशी कंटेंट देख रहे लोग'

मुंबई, 1 मार्च (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा समय के साथ कई बदलावों से गुजरा है। कहानियों का अंदाज बदला है, तकनीक बदली है, और दर्शकों की पसंद भी बदली है। लेकिन इन सबके बीच बच्चों के लिए फोकस फिल्मों की कमी साफ देखी जा सकती है।एक समय था जब परिवार के साथ बैठकर देखी जाने वाली सादी फिल्में बनती थीं। आज बड़े बजट, एक्शन, और तेज रफ्तार कहानियों के दौर में बच्चों के लिए खास तौर पर फिल्में कम बन रही हैं। इसी मुद्दे पर आईएएनएस से बातचीत में फिल्म निर्देशक रवि उदयवार ने अपनी राय खुलकर रखी है।रवि उदयावर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "हिंदी सिनेमा में बच्चों की फिल्मों की कमी साफ नजर आती है। हमने बच्चों के लिए फिल्में बनाना लगभग बंद कर दिया है। मेरा मानना है कि बच्चों के लिए ऐसी कहानियां जरूरी हैं जो उनकी दुनिया को समझें, उनकी मासूमियत को बचाए रखें, और ईमानदारी से उनकी भावनाओं को दिखाएं।"रवि ने कहा, ''आज की फिल्मों में मासूमियत कम होती जा रही है। मैं अपनी फिल्मों के दौरान भी कलाकारों से बार-बार कहता हूं कि रोमांस में सादगी और मासूमियत वापस लाने की कोशिश करें। पहले की प्रेम कहानियों में एक सहजता होती थी, जो दिल को सीधे छूती थी। अब सब कुछ बहुत ज्यादा दिखावटी हो गया है। भावनाओं को गहराई से महसूस करने की जगह उन्हें बाहरी अंदाज में पेश किया जा रहा है। मुझे पुराना दौर याद आता है जब छोटी-छोटी बातों में भी सच्चाई नजर आती थी।''उन्होंने आगे कहा, ''जब बच्चों और किशोर दर्शकों को उनके मन की फिल्में नहीं मिलतीं, तो वे दूसरी जगहों की ओर रुख करते हैं। आजकल कई युवा दर्शक के-ड्रामा और विदेशी कंटेंट देख रहे हैं, क्योंकि वहां उन्हें सरल और सच्ची कहानियां मिल रही हैं। वे ऐसी कहानी चाहते हैं जिसमें दो लोग साधारण तरीके से प्यार में पड़ें और रिश्ते को समय दें। दर्शक भारी-भरकम और उलझी हुई कहानी से ज्यादा सरल भावनाएं देखना चाहते हैं।''रवि उदयावर ने कहा, ''दर्शकों की मांग है कि उन्हें जरूरत से ज्यादा ड्रामा न दिया जाए। वे बस दो लोगों के बीच पनपते रिश्ते को महसूस करना चाहते हैं। मेरी फिल्म में यही कोशिश होती है कि कहानी को थोड़ा धीमा रखा जाए, ताकि दर्शक किरदारों के साथ जुड़ सकें और उनकी भावनाओं को समझ सकें। कभी-कभी सिनेमा को रफ्तार कम करके भी कहानी दिखानी चाहिए, ताकि मासूमियत और सच्चाई वापस आ सके।''अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

March 01, 2026 08:42 UTC


मिडिल ईस्ट में भयंकर बमबारी, क्या है भारत में सभी विदेशी नागरिकों के लिए MEA की जरूरी सलाह?

लेखक के बारे में अशोक उपाध्याय अशोक उपाध्याय, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर ड‍िज‍िटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव। साल 2014 में नवभारत टाइम्स हिंदी अखबार से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत की थी। पॉलिटिक्स, खेल, क्राइम बीट पर रिपोर्टिंग में महारत। अमर उजाला देहरादून में भी सेंट्रल डेस्क पर काम किया है। साथ ही कई चुनावों में ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। पिछले पांच साल से NBT डिजिटल में न्यूज डेस्क पर काम कर रहे हैं। गूगल ट्रेंड्स को पकड़ने और एआई टूल्स के इस्तेमाल की अच्छी समझ है। JIMMC नोएडा से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।... और पढ़ें

March 01, 2026 08:40 UTC


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