nepal pokhara indian vehicle: इस साल पोखरा में न्यू इयर नहीं मना पाएंगे भारतीय, यह है वजह - nepal bans vehicles with indian number plates into pokhara so no new year celebration this time - News Summed Up

nepal pokhara indian vehicle: इस साल पोखरा में न्यू इयर नहीं मना पाएंगे भारतीय, यह है वजह - nepal bans vehicles with indian number plates into pokhara so no new year celebration this time


इन जगहों पर जाने से बचें, आ सकती है जान पर आफत यह दुनिया जिस तरह से रहस्यमय से लेकर अजीबोगरीब चीजों से भरी पड़ी है, उसी तरह यह कई खूबसूरत जगहों और दिलकश नजारों से भी भरी पड़ी है। अडवेंचर के शौकीनों के लिए भी इस दुनिया में जगहों की कोई कमी नहीं है। पर क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जो सिर्फ लोगों के लिए ही नहीं बल्कि पेड़-पौधों के लिए भी घातक हैं? इनमें से कुछ तो ऐसी हैं जहां चंद घंटों में जान भी जा सकती है। यहां हम ऐसी जगहों के बारे में जानकारी दे रहे हैं जिनसे आपको दूर रहना चाहिए। (सांकेतिक तस्वीर)अमेरिका स्थित डेथ वैली दुनिया की सबसे गर्म जगहों में शुमार है। यह उत्तरी अमेरिका की सबसे सूखी और सबसे गर्म जगह के रूप में जानी जाती है। यहां का तापमान इतना ज्यादा होता है कि व्यक्ति यहां सिर्फ चंदे घंटे ही जिंदा रह पाता है। (फोटो: Instagram@deathvalleynps)यह भी दुनिया की सबसे गर्म जगहों में शामिल है। अत्यधिक तापमान के अलावा यहां कई ज्वालामुखी और गीजर हैं, जिनसे लगातार जहरीली गैस, लावा और आग निकलती रहती है। इन्हीं की वजह से यहां रहना तो क्या जाने के बारे में भी नहीं सोचा जा सकता। कई लोग डानाकिल डिप्रेशन को धरती पर मौजूद 'नर्क का द्वार' भी मानते हैं। यहां साल पर औसत तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस रहता है। (सांकेतिक तस्वीर-Thinkstock)यह मार्शल आइलैंड पर स्थिति बिकिनी एटोल नाम की जगह भी न तो रहने के लिए सही मानी जाती है और न ही पर्यटकों के लिए। 1940 से 1950 के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने यहां कई परमाणु परीक्षण किए थे, जिसकी वजह से यहां की जमीन में कई रेडियोएक्टिव तत्व मिल गए और आबोहवा भी जहरीली हो गई। यहां रहने वाले लोगों को अपने घर छोड़कर जाना पड़ा। माना जाता है कि यहां की हवा और मिट्टी में अभी भी इतना रेडिएशन है कि कैंसर भी हो सकता है। (सांकेतिक तस्वीर-Thinkstock)इस आइलैंड पर पब्लिक के जाने पर पाबंदी है क्योंकि यह हजारों जहरीले सांपों से भरा पड़ा है। इसी वजह से इसे स्नेक आइलैंड कहा जाता है। यहां सिर्फ चुनिंदा शोधकर्ता और ब्राजील की नेवी को ही जाने की परमिशन है।इस गांव से रामायण और महाभारत का कनेक्शन, एक बार जरूर जाएं देवभूमि उत्तराखंड अपनी अद्भुत संस्कृति और खान-पान के अलावा खूबसूरती के लिए भी मशहूर है। हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक यहां घूमने आते हैं। लेकिन इस राज्य में अभी भी कई ऐसी जगहें हैं जो अछूती और भूली-बिसरी सी हैं, पर किसी जन्नत से कम नहीं। (फोटो: kalap.in)ऐसी ही एक जगह है कलाप। उत्तराखंड के ऊपरी गढ़वाल क्षेत्र में स्थित यह गांव कई इलाकों से कटा हुआ है और ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता भी नहीं है। यहां की आबादी भी बहुत कम है। पर यह गांव फिर भी खास है और अपने अंदर एक गहरा राज समेटे हुए है। (फोटो: kalap.in)कलाप उत्तराखंड की टन्स घाटी में स्थित है और इस पूरी घाटी को महाभारत की जन्मभूमि माना जाता है। कहा जाता है कि यहां से रामायण और महाभारत का इतिहास जुड़ा हुआ है। इसी वजह से यहां के लोग खुद को कौरव और पांडवों को वंशज बताते हैं।यह गांव अन्य इलाकों से कटा हुआ है और यहां की जिदंगी भी काफी मुश्किल भरी है। यहां के निवासियों की आमदनी का मुख्य सहारा खेती ही है। इसके अलावा वे भेड़-बकरी पालते हैं। इस गांव की अद्भुत खूबसूरती और रामायण, महाभारत से खास कनेक्शन के चलते इसे डिवेलप किया जा रहा है। (फोटो: kalap.in)यहां कर्ण का मंदिर भी है और कर्ण महाराज उत्सव भी मनाया जाता है। यह उत्सव 10 साल के अंतराल पर मनाया जाता है। जनवरी में यहां पांडव नृत्य किया जाता है, जिसमें महाभारत की विभिन्न कथाओं को प्रदर्शित किया जाता है। (फोटो: kalap.in)चूंकि यह जगह काफी दुर्गम है, इसलिए जो कुछ भी खाया-पिया या ओढ़ा-पहना जाता है, वह सब कलाप में बनता है। यहां खाने के लिए लिंगुड़ा से लेकप पपरा, बिच्छू घास और जंगली मशरूम है। वहीं खसखस, गुड़ और गेंहू के आटे के साथ एक खास डिश भी बनाई जाती है। कलाप दिल्ली से 540 किलोमीटर दूर है, जबकि यह देहरादून से 210 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां साल के किसी भी वक्त जाया जा सकता है। स्नोफॉल का व्यू भी यहां से काफी शानदार होता है। (सांकेतिक तस्वीर)जो लोग नए साल के जश्न के लिए नेपाल के सबसे पॉप्युलर डेस्टिनेशन पोखरा जाने की प्लानिंग कर रहे थे, उनके लिए एक बुरी खबर है। नए साल से पहले ही नेपाल ने भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों की पोखरा में एंट्री पर बैन लगा दिया है। इससे वहां के टूरिजम पर तो पड़ेगा ही, साथ ही इससे कई टूरिस्टों को धक्का लगा है।बता दें कि नेपाल को 'देवताओं का घर' कहा जाता है। यहां नैचरल ब्यूटी से लेकर अडवेंचर स्पॉट्स और कई धार्मिक स्थल भी हैं। पोखरा तो झीलों और अपनी दिलकश वादियों के लिए मशहूर है। पोखरा को हिमालय ट्रेल के अन्‍नपूर्णा सर्किट के गेटवे के तौर पर भी जाना जाता है। यहां कई ऐसी जगहें हैं, जो यहां आने वाले हर पर्यटक को अपने मोहपाश में बांध लेती हैं।इस फॉल या झरने को रहस्‍मय माना जाता है। इसका पानी किसी नदी या फिर लैगून में जाने के बजाय गायब होने और गुफाओं से गुजरने से पहले एक डार्क होल में गिरता है। यही वजह है कि टूरिस्‍ट्स को यह जगह काफी अट्रैक्‍ट करती है। इस फॉल के नामकरण के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। कहावत है कि एक बार दावी नाम की एक स्विस महिला स्‍वीमिंग के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद से ही इस फॉल का नाम दावी पड़ गया।यह एक छोटा सा पहाड़ी गांव है, जो प्राकृतिक सुंदरता से भरा पड़ा है। यहां कई तरह के पक्षी और जानवर देखने को मिलते हैं। दावी फॉल की तरह पोखरा की यह जगह भी लोगों के बीच काफी मशहूर है।पोखरा स्थित शांति स्तूप को पीस पेगोड़ा भी कहा जाता है। यह खूबसूरत इमारत आनंदु पर्वत पर स्थित है। यह विश्व शांति शिवालय है, जिसका निर्माण बौद्ध भिक्षुओं ने शांति के प्रतीक के रूप में किया था। स्तूप तक पहुंचने के तीन अलग-अलग रास्ते हैं। या तो टूरिस्ट नाव के जरिए जा सकते हैं या फिर जंगल


Source: Navbharat Times December 30, 2019 08:40 UTC



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