सहवास की पूरी प्रक्रिया जिसमें फोरप्ले, प्ले और क्लाइमैक्स सभी शामिल हैं, कुल कितना समय लगना चाहिए? यह भी जरूर बताएं कि प्रवेश के कितने समय बाद क्लाइमैक्स पर पहुंचना सही है? -कई पाठकज्यादातर महिलाओं को फोरप्ले ज्यादा पसंद होता है और सच तो यह है कि 'फोरप्ले में ही असल प्ले होता है।' सीधे कहें तो महिलाओं को सफर में ज्यादा मजा आता है। जब उस आनंद में इजाफा होता है, तब महिला क्लाइमैक्स पर पहुंचती है और उन्हें सुकून मिल जाता है। जहां तक फोरप्ले के टाइम की बात है तो इसका टाइम कभी किसी शख्स के लिए तय नहीं हो सकता। इरादा यह होना चाहिए कि दोनों को संतुष्टि मिले क्योंकि इसे कहते हैं (सम+भोग)। चाहे वह प्रवेश के पहले हो, प्रवेश के वक्त हो या प्रवेश के बाद, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ऋषि वात्स्यायन अपने महाग्रंथ 'कामसूत्र' में कहते हैं कि पुरुष को यह ध्यान रखना चाहिए कि महिला को किसी भी तरह संतुष्टि मिल जानी चाहिए। उन्होंने तो यहां तक कहा है कि अगर कोई पुरुष अपने पार्टनर को सीधी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता या उसके पहले स्खलित हो जाता है तो उसे दूसरे तरीकों से संतुष्टि का अहसास करा देना चाहिए।आप लोगों ने यह भी पूछा है कि प्रवेश के बाद कितना वक्त? इसका जवाब यह है कि जब तक आपका पार्टनर संतुष्ट नहीं होता, तब तक अपना डिस्चार्ज रोकने की कोशिश करें। यानी आपको क्लाइमैक्स पर नहीं पहुंचना है। अगर नाकाम रहें तो भी चिंता की बात नहीं। ऐसा अक्सर हो जाता है। कई बार पोर्न फिल्मों के असर से पुरुष लंबे समय तक इंटरकोर्स करना चाहते हैं। लेकिन ध्यान रहे, अमूमन उस तरह से करना मुमकिन नहीं।आपके मन में भी कोई सवाल है, तो आपपर अपने सवाल भेज सकते हैं।
Source: Navbharat Times September 29, 2019 06:33 UTC