भास्कर न्यूज, पुणे। बिना किसी वैध दस्तावेज और भारत-बांग्लादेश सीमा पर सक्षम नागरिक अधिकारियों की लिखित अनुमति के अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर पुणे में रह रहे 19 बांग्लादेशी महिला एवं पुरुषों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यू. कुलकर्णी ने सभी आरोपियों को दो वर्ष की सक्त मेहनत (सश्रम कारावास) और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।इस मामले में शबिना उर्फ साथी इकलास मुल्ला सहित कुल 19 आरोपी (सभी निवासी बांग्लादेश) शामिल हैं। अदालत ने आदेश में कहा है कि जुर्माना अदा न करने पर प्रत्येक आरोपी को 10 दिन की अतिरिक्त सक्त मेहनत की सजा भुगतनी होगी। साथ ही दो वर्ष चार माह पंद्रह दिन की सक्त मेहनत और प्रति आरोपी 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना न भरने पर एक माह की अतिरिक्त सक्त मेहनत की सजा भी निर्धारित की गई है। सजा पूरी होने के बाद सभी दोषियों को बांग्लादेश भेजने की व्यवस्था करने के निर्देश भी अदालत ने दिए हैं।अतिरिक्त सरकारी वकील प्रमोद हजारे ने सरकार की ओर से प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। अभियोजन के अनुसार, सभी आरोपी रात के समय भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात गश्ती दल की नजर से बचते हुए चोरी-छिपे भारत में दाखिल हुए और पुणे में अवैध रूप से निवास कर रहे थे। जांच के दौरान उनके पास भारतीय नागरिकता साबित करने वाला कोई भी वैध दस्तावेज नहीं पाया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वे बांग्लादेशी नागरिक हैं।इस मामले में फरासखाना पुलिस थाना में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस निरीक्षक (अपराध) मंगेश जगताप, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रशांत भस्मे और पुलिस निरीक्षक (अपराध) उत्तम नामवाडे के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस उपनिरीक्षक ज्ञानोबा महानवर और न्यायालयीन अमलदार सहायक पुलिस फौजदार संतोष शिंदे ने सत्र न्यायालय की कार्यवाही संभाली।
Source: Dainik Bhaskar January 09, 2026 14:42 UTC