फर्जी रजिस्ट्री बैनामा मामले में गवाह दो सगे भाइयों प्रकाश चंद्र भट्ट और ललित चंद्र भट्ट की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी ने फर्जी रजिस्ट्री बैनामा मामले में गवाह दो सगे भाइयों प्रकाश चंद्र भट्ट और ललित चंद्र भट्ट की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। दोनों भाई तल्लीताल, नैनीताल स्थित कचहरी क्वार्टर के निवासी हैं।. अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला ग्राम बसगाँव, पट्टी देवदारू, ब्लॉक रामगढ़ से जुड़ा है। यहां की भूमि सुरक्षा समिति के सदस्यों ने 06 जुलाई 2025 को थाना भवाली में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि ग्राम बसगाँव, देवदारू के खाता संख्या-28 और 54 में दर्ज खसरा स्थित भूमि जयकिशन जोशी और मुरलीधर जोशी पुत्रगण हरिदत्त जोशी के नाम बतौर भूमिधर दर्ज थी।आरोप है कि हरीश पांडे (निवासी सतपुरी बसगाँव), भगवंत कुमार (निवासी ढोकाने वाटरफॉल, सुयालबाड़ी) और मोहन सिंह ने षड्यंत्र रचकर 16 अगस्त 2024 को शंकर सिंह और खीम सिंह को इस भूमि का मालिक बनाया। इसके बाद 13 नाली 7 मुट्ठी भूमि की रजिस्ट्री मोहन सिंह के नाम पर कर दी गई, जबकि शेष भूमि की पावर ऑफ अटॉर्नी हरीश चंद्र पांडे के नाम की गई थी।जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) नैनीताल सुशील कुमार शर्मा ने अभियुक्त प्रकाश चंद्र भट्ट और ललित चंद्र भट्ट की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी भाई फर्जी दस्तावेज बनाकर खरीद-फरोख्त करने वालों को नहीं जानते थे और वे उस गाँव के निवासी भी नहीं हैं। इसके बावजूद, प्रकाश और ललित ने लालच में आकर गवाही दी। इस मामले में धोखाधड़ी के दो अन्य आरोपियों की जमानत पहले ही खारिज हो चुकी है।अभियोजन पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि यदि वास्तविक भूमिधर जयकिशन और मुरलीधर जीवित होंगे भी, तो उनकी उम्र वर्तमान समय में 115-120 वर्ष तक होगी। इन सभी तर्कों के आधार पर, न्यायालय ने दोनों भाइयों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
Source: Dainik Bhaskar April 07, 2026 19:08 UTC