नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। तेज धूप और भीषण गर्मी से दिल्ली-एनसीआर में ओजोन प्रदूषण का खतरा भी बढ़ गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक रविवार को भी दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम की हवा में ओजोन प्रदूषक कणों की मौजूदगी दर्ज की गई। सफर इंडिया ने तो ओजोन के लिए अलर्ट भी जारी किया है। दिल्ली की 2 करोड़ से अधिक के साथ एनसीआर की आबादी भी चपेट में है।जानकारी के मुताबिक आमतौर पर हवा में प्रदूषक तत्व पीएम 10 और पीएम 2.5 के आधार पर ही वायु गुणवत्ता को मापा जाता है, लेकिन इन दिनों दिल्ली-एनसीआर की हवा में पीएम 10 और पीएम 2.5 से भी ज्यादा खतरनाक प्रदूषक तत्व ओजोन की मात्रा रिकॉर्ड की जा रही है। सतह पर पाए जाने वाले ओजोन कणों को सेहत के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है।सीपीसीबी द्वारा रविवार को जारी एयर क्वालिटी रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के साथ-साथ गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम की हवा में भी ओजोन की मौजूदगी पाई गई है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च यानी सफर इंडिया ने भी ओजोन की मौजूदगी को खासतौर पर इंगित किया है। दिल्ली एनसीआर निवासियों को ओजोन से बचाव का अलर्ट भी जारी किया गया है। दिल्ली की सेहत पर सप्ताह भर भारी रहा ओजोन ओजोन प्रदूषण के मामले में दिल्ली की हालत खासतौर पर खराब नजर आ रही है। बीते पूरे सप्ताह में सिर्फ एक ही दिन ऐसा रहा जब हवा में ओजोन की मौजूदगी नहीं रही।सीपीसीबी के मुताबिक इस सप्ताह में तीन जून के अलावा बाकी सभी दिनों में हवा में ओजोन प्रदूषक तत्व तय मानकों से अधिक मात्रा में मौजूद रहे हैं। इससे पहले 25 से लेकर 30 मई तक भी हवा में ओजोन का प्रदूषण मौजूद रहा था।कैसे पैदा होता है ओजोन का प्रदूषणसेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) में वायु प्रदूषण विशेषज्ञ विवेक चट्टोपाध्याय के मुताबिक, बेहद तीखी धूप की किरणें वाहनों से निकलने वाले धुएं से प्रतिक्रिया करके ओजोन के प्रदूषक तत्व बनाते हैं। यह एक तरह का ऑक्साइड होता है। वाहनों से निकलने वाले धुएं के अलावा यह कचरा जलाने या उद्योगों से निकलने वाले धुएं से भी पैदा होता है।क्यों खतरनाक है ओजोन2017 में अमेरिका के हेल्थ इफेक्ट इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ओजोन के बढ़ने की वजह से भारत में जल्दी होने वाले मौत का ग्राफ 148 फीसद बढ़ा है। ओजोन का सीधा असर फेफड़ों और क्रोनिक ऑब्सट्रेक्टिव पल्मोनरी डिजिज (सीओपीडी) पर पड़ता है। ओजोन से बचने के लिए नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और ऑर्गेनिक कंपाउंड पर नियंत्रण जरूरी है।कई बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं लोगओजोन काफी खतरनाक गैस है और कुछ ही घंटों में इसकी वजह से गंभीर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। ओजोन बाहरी गतिविधियों के लिए सबसे खतरनाक है। अस्थमा, सांस और फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे व्यक्ति पर इसका असर तुरंत दिखने लगता है। ओजोन की वजह से फेफड़ों के टिशू खराब होते हैं, छाती में दर्द, कफ, सिरदर्द, छाती में जकड़न आदि समस्या हो सकती है। इसके अलावा दिल की बीमारी, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों के लिए भी यह घातक है।यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाई ओजोन एरिया में रहने वाले बच्चे यदि तीन या इससे अधिक दिन गेम खेलते हैं तो उनका अस्थमा की चपेट में आने के संभावना उन बच्चों से अधिक हो जाती है जो कोई गेम नहीं खेलते। ओजोन एक पावरफुल ऑक्सिडाइजर है जो सेल्स को डैमेज करता है। बच्चे और किशोर इसके शिकार सबसे अधिक होते हैं। यही वजह है कि समय पूर्व मृत्यु दर भी बढ़ती है। यह फसलों को भी खराब करता है।सीएसई के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में किशोरों, बच्चों व खेतो में काम करने वालों के साथ अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों की संख्या काफी अधिक हैं। इसलिए एक्शन प्लान में गैसों के उत्सर्जन को कम करने की योजना होनी चाहिए जिसमें वाहनों, उद्योगों और ऊर्जा संयंत्रों सभी को शामिल किया जाए।दो से तीन बजे का वक्त सबसे घातकदिल्ली में इन दिनों दो बजे से लेकर तीन बजे के बीच धूप का स्तर सबसे ज्यादा तीखा रहता है। इस दौरान तापमान भी सबसे ज्यादा ही दर्ज किया जाता है। इसी तीखी धूप के दौरान ओजोन के प्रदूषक तत्व भी सबसे ज्यादा पैदा होते हैं, इसलिए ओजोन से होने वाले नुकसान का खतरा भी इसी एक घंटे के बीच सबसे ज्यादा रहता है।दिल्ली-NCR की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिकलोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एपPosted By: JP Yadav
Source: Dainik Jagran June 10, 2019 05:52 UTC