वो मौके जब सुशील मोदी ने BJP के बदले नीतीश का साथ दिया, अब नप गए - News Summed Up

वो मौके जब सुशील मोदी ने BJP के बदले नीतीश का साथ दिया, अब नप गए


​2014 में नीतीश को बताया था पीएम मटीरियल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी के अंदर से नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने की मांग उठ रही थी। उधर जेडीयू ने 2012 से ही नीतीश कुमार का नाम एनडीए के पीएम कैंडिडेट के रूप में उभारना शुरू कर दिया था। बीजेपी की तरफ से नरेंद्र मोदी और जेडीयू की तरफ से नीतीश कुमार के लिए चल रही मुहीम के दौरान सुशील खुल्लम-खुल्ला नीतीश के खेमे में चले गए। उन्होंने पाला ही नहीं बदला, अपने स्टैंड पर टिके भी रहे। उधर, गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे जैसे बिहार बीजेपी के धाकड़ चेहरे नीतीश की मुहीम का जोरदार विरोध कर रहे थे। बीजेपी अपने नेता सुशील मोदी के व्यवहार से क्षुब्ध थी। आग में घी का काम किया 2012 में ही सुशील मोदी के एक इंटरव्यू ने जिसमें उन्होंने नीतीश को पीएम मटीरियल बता दिया।​2018 का अर्जित शाश्वत कांड और सुशील मोदी का स्टैंड मार्च 2018 में भागलपुर में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान भी सुशील कुमार मोदी की गतिविधियों से बीजेपी बहुत आहत हुई। इस हिंसा में सीधे-सीधे अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत का नाम जुड़ा। वो गिरफ्तार हुए और अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। नीतीश सरकार के इस ऐक्शन से बीजेपी में रोष था। सरकार बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की थी, लेकिन अर्जित पर ऐक्शन का फैसला अकेले जेडीयू ने लिया। पूरी बीजेपी इसके खिलाफ थी, लेकिन सुशील मोदी परेशान क्या उलझन में भी नहीं दिखे। स्वाभाविक है कि उन्होंने फिर से बीजेपी के खिलाफ नीतीश कुमार को तवज्जो दी।​दंगे की घटनाओं पर नीतीश के पक्ष लेते मोदी 2017 में बिहार में कई जगहों पर सांप्रदायिक दंगे हुए। नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े तो बताते हैं कि उस साल बिहार दंगों के मामले में देश में अव्वल रहा था। आंकड़े बताते हैं कि 2017 में देशभर में कुल 58,729 दंगे हुए जिनमें अकेले 11,698 घटनाएं बिहार में दर्ज की गईं। बात अगर सांप्रदायिक दंगों की हो तो आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 में देश में कुल 723 सांप्रदायिक दंगे हुए जिनमें 163 बिहार में हुए। बिहार इस मामले में देशभर में टॉप पर रहा। बड़ी बात यह है कि वर्ष 2016 के मुकाबले 2017 में अन्य राज्यों में इस तरह की वारदातें कम हुई हैं। हालांकि, बिहार में इसका उल्टा हुआ और वहां वर्ष 2016 में 139 सांप्रदायिक दंगों की तुलना में वर्ष 2017 में 24 अधिक दंगे हो गए। इसी तरह मार्च-अप्रैल 2018 में भागलपुर, औरंगाबाद, समस्तीपुर, मुंगेर, शेखपुरा, नालंदा और नवादा में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं घटीं। विपक्ष नीतीश कुमार को निशाना बना रहा था, लेकिन सुशील मोदी वहां भी ढाल बनकर खड़े हो गए। आरजेडी नेता तेजस्वीर यादव के आरोपों पर मोदी ने कहा कि प्रदेश में हालात सामान्य हो जाएं, इसके लिए तेजस्वी यादव अपनी भूमिका का समुचित निर्वहन नहीं कर रहे हैं।​जब बीजेपी के सीएम की मांग पर मोदी को लगी मिर्ची! बीजेपी नेता सुशील मोदी पर बड़ा आरोप यह है कि उन्होंने नीतीश कुमार के साथ अपना उपमुख्यमंत्री का बर्थ कन्फर्म करवा रखा है, इसलिए वो कभी राज्य में बीजेपी के पक्ष में यथास्थिति को बदलना ही नहीं चाहते हैं। सुशील पर इस आरोप में कितना दम है, इसका एक उदाहरण बेजेपी नेता संजय पासवान के एक बयान और उस पर सुशील मोदी की प्रतिक्रिया में देखा जा सकता है। संजय पासवान ने 2019 में कहा था कि बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना चाहिए। उनके साथ ही कुछ और नेताओं ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बीजेपी कोटे से बनाए जाने की मांग की। सुशील मोदी यहां भी नीतीश के पक्ष में डट गए। उन्होंने ट्वीट किया, 'नीतीश कुमार बिहार में एनडीए के कैप्टन हैं और 2020 में गले विधानसभा चुनाव के दौरान भी कैप्टन रहेंगे। जब कैप्टन चौका, छक्का जड़ते हुए विरोधियों को पारी दर पारी मात दे रहा हो तो बदलाव का सवाल ही कहां उठता है।' हालांकि, मोदी ने यह ट्वीट बाद में डिलीट कर दिया। लेकिन बीजेपी के अंदर यह सोच गहरा गई कि भले ही मोदी हमारे नेता हैं, लेकिन मजबूत नीतीश और जेडीयू को कर रहे हैं।


Source: Navbharat Times November 16, 2020 03:26 UTC



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