वो जगह जहां पियानो सुनते-सुनते चिल्ल मारते हैं बूढ़े हाथी - News Summed Up

वो जगह जहां पियानो सुनते-सुनते चिल्ल मारते हैं बूढ़े हाथी


पूरी दुनिया में थाईलैंड के हाथियों के बारे में सब जानते हैं। थाईलैंड का तो राष्ट्रीय जानवर भी हाथी ही है। हाथी अपनी ही मस्ती में रहता है, इसलिए उसे मस्तमौला भी कहा जाता है। थाईलैंड में एक एलीफेंट वर्ल्ड सेंचुरी है। यहां कि खास बात यह है कि यहां हाथी आराम से बैठकर संगीत सुनते हैं।बहुत भाती है धुनथाईलैंड के शहर कंचनाबुरी में एलीफेंट वर्ल्ड सेंचुरी है। इस फोटो में आपको ब्रिटेन के पियानिस्ट पॉल बोर्टन दिख रहे हैं। पॉल बीमार, बुजुर्ग और घायल होने के बाद बचाए गए हाथियों को पियानो की धुन सुनाते हैं। इनमें कई हाथी अपंग और अंधे भी हैं।रिटायरमेंट सेंचुरी भी कहा जाता हैजानकारी के लिए बता दें कि इस एलीफेंट वर्ल्ड को रिटायरमेंट सेंचुरी भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां बूढ़े-बूढ़े हाथी काफी हैं। वो असहाय हो चुके हैं। उनकी देखभाल काफी अच्छे से की जाती है।हाथियों को पसंद है यह थेरेपीहैरानी तो आपको इस बात से होगी कि हाथियों को भी संगीत की यह थेरेपी काफी पसंद है। वो खड़े हो जाते हैं आराम से और सुनते हैं पियानो।किया जाता है उपचारम्यूजिक थेरेपी के अलावा यहां इन बूढ़े हाथियों का उपचार भी किया जाता है। बता दें कि इंडिया, थाईलैंड, कंबोडिया, नेपाल और श्रीलंका ऐसे देशों में से हैं, जहां हाथियों की हालत काफी खराब है। ऐसे में इस सेंचुरी से कुछ उम्मीद बंधती है। जाहिर यह होता है कि जानवरों को भी संगीत पसंद है।


Source: Navbharat Times December 18, 2018 07:52 UTC



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