जागरण संवाददाता, पटना। रेल पटरी पार करते समय होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। रेल मंत्री के निर्देश पर अब देशभर में ऐसे स्थानों पर सुविधाजनक रेल पुलिया (सबवे) बनाई जाएंगी, जहां लोग रोजमर्रा के काम के लिए पटरियां पार करने को मजबूर होते हैं। इस पहल का असर बिहार समेत पूर्व मध्य रेल के अंतर्गत आने वाले इलाकों में भी जल्द दिखेगा। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय वर्कशाप के बाद यह निर्णय लिया गया कि जिन जगहों पर एक ओर बस्ती और दूसरी ओर खेत, स्कूल, श्मशान या अन्य जरूरी स्थान हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर पुलियाएं बनाई जाएंगी।खास बात यह है कि इन पुलियाओं का निर्माण बेहद तेज गति से सिर्फ 12 घंटे में किया जा सकेगा। बिहार में क्यों है इसकी जरूरत? पटना, आरा, बक्सर, गया, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे जिलों में आज भी बड़ी संख्या में लोग रोज़ाना अनधिकृत रूप से रेल पटरियां पार करते हैं। खासकर पटना के आसपास दानापुर रेल मंडल और फतुहा–बख्तियारपुर सेक्शन में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। स्कूल जाने वाले बच्चे, किसान और मजदूर अक्सर जोखिम उठाकर पटरियां पार करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती रहती हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अब पूर्व मध्य रेल के सभी मंडलों को ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान करने का निर्देश दे दिया गया है, जहां यह पुलियाएं तत्काल बनाई जा सकती हैं। 12 घंटे में कैसे बनेगी पुलिया? रेलवे की इस नई योजना के तहत पुलिया का स्ट्रक्चर पहले से तैयार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित स्थल पर ब्लाक लेकर रेल पटरी को अस्थायी रूप से हटाया जाएगा और 12 घंटे के भीतर पुलिया स्थापित कर दी जाएगी।इसके बाद ट्रैक को फिर से चालू कर दिया जाएगा। इससे ट्रेनों के संचालन पर न्यूनतम असर पड़ेगा। इन पुलियाओं का डिजाइन ऐसा होगा कि पैदल यात्री के साथ-साथ साइकिल और मोटरसाइकिल सवार भी आसानी से इसका उपयोग कर सकेंगे।
Source: Dainik Jagran March 27, 2026 21:20 UTC