जागरण संवाददाता, वाराणसी। नौतपा का मान पूर्वांचल में काफी है, किसान से लेकर आम इंसान और विज्ञानी भी इसका महत्व स्वीकारते हैं। वैसे तो इसी दौरान देश में मानसून केरल और तमिलनाडु के रास्ते देश में प्रवेश करता है। मान्यताओं के अनुसार सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा की शुरुआत होती है।इस अवधि में तेज धूप, लू और अत्यधिक गर्मी का अनुभव होता है। लोक मान्यता के अनुसार, नौतपा की तपन कृषि और मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती है। ज्येष्ठ माह में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम होने के कारण तापमान में वृद्धि होती है, जिससे भीषण गर्मी का सामना करना पड़ता है। अब से मात्र दो माह की दूरी पर नौतपा है और साठ दिन में ही यह पूर्वांचल में असर दिखाने लगेगा।लोक विज्ञानी भड्डरी की कहावत "तपा नखत में जो चुइ जाय, सभी नखत फीके पड़ जाएं" का उल्लेख भी पुरनिए करते हुए नौतपा का मान स्वीकारते हैं। इस बार वर्ष 2026 में नौतपा की शुरुआत 25 मई से होगी और यह 2 जून तक जारी रहेगा। पूर्वांचल में इस दौरान सूरज धरती को तपाएगा और बारिश के अनुकूल मौसम को बनाए रखेगा। हालांकि नौतपा के इर्द गिर्द प्री मानसूनी परिस्थितियां भी सक्रिय होती हैं और मानसूनी हाताल इसी दौरान तय होता है।नौतपा 2026 ज्येष्ठ माह में सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ शुरू होगा, जो आमतौर पर 25 मई से आरंभ होकर जून के पहले सप्ताह तक चलता है। यह नौ दिन की भीषण गर्मी और लू का समय होता है, जो अच्छी मानसून बारिश और कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस समय सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है, जिससे उसकी किरणें सीधे पड़ती हैं और जमीन तथा समुद्र का पानी तेजी से तपता है, जिससे वाष्पीकरण की प्रक्रिया तेज होती है।कृषि के दृष्टिकोण से, लोक मान्यता के अनुसार, यदि नौतपा में तेज गर्मी पड़ती है, तो मानसून में अच्छी बारिश की संभावना बढ़ जाती है। यदि इस दौरान बारिश होती है, तो आगामी महीनों में वर्षा की मात्रा कम हो सकती है। नौतपा का मौसम न केवल कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालता है। इस समय की गर्मी और लू से बचने के लिए उचित सावधानियों का पालन करना आवश्यक है।
Source: Dainik Jagran March 27, 2026 22:02 UTC