पीयूष ने तय किया कि वह नेहरू के बारे में बनाई जा रही धारणाओं का तथ्यों के आईने में परीक्षण करेंगे. यह किताब पढ़ते हुए इस बात का भी खयाल आता है कि दरअसल नेहरू के साथ अन्याय सिर्फ़ उन्होंने नहीं किया है जो नेहरू को लेकर दुष्प्रचार करते रहे हैं, उन्होंने भी किया है जो मूलतः नेहरू के मुरीद हैं लेकिन यह देखने में नाकाम रहे हैं कि नेहरू ने कितने-कितने प्रसंगों पर कितनी बारीकी से विचार किया है. लेकिन यह बात कम लोगों को याद है कि नेहरू ने भी कांग्रेस की सख्त आलोचना की थी. एक नेहरू वे हैं जो स्वाधीनता संग्राम के दौरान जेल काटते हुए देश और दुनिया के सवालों पर बिल्कुल आधुनिक ढंग से विचार कर रहे हैं, एक नेहरू वे हैं जो भारतीय सभ्यता और संस्कृति की विराट कविता में परंपरा और आधुनिकता के अलग-अलग तत्वों की शिनाख़्त कर रहे हैं, एक नेहरू वे हैं जो आज़ादी के बाद पहले प्रधानमंत्री के तौर पर देश के निर्माण के यज्ञ में लगे हुए हैं और यह जानते-मानते हैं कि उन्हें हर किसी की जवाबदेही लेनी है, स्वतंत्रता को समानता और समृद्धि के साथ जोड़कर अर्थवान बनाना है और भारतीय एकता और अखंडता को भारतीय अंतरात्मा का बुनियादी मूल्य बनाना है न कि कोई थोपी हुई व्यवस्था. इस समीक्षा पर- इस किताब की तरह ही- शायद नेहरू के प्रति मोहग्रस्त होने के आरोप लग सकते हैं, लेकिन यह सच है कि नेहरू का मोह इतना प्रबल इसलिए भी है कि अपनी कई विफलताओं के बावजूद नेहरू ने भारत नाम के राष्ट्र राज्य को एक ऐसी उदात्त और मानवीय शक्ल दी, जिसकी ओर दुनिया देख सके- वह भी एक ऐसे समय में, जब सांप्रदायिकता का उन्माद अपने चरम पर था और किसी का दिमाग़ ख़राब करने के लिए पर्याप्त था.
Source: NDTV May 05, 2019 20:37 UTC