टिप्पणी / चीफ जस्टिस बोले- फांसी के खिलाफ अपीलों का एक छोर पर अंत जरूरी, दोषी को कभी नहीं लगना चाहिए इसका सिरा खुला रहेगा - News Summed Up

टिप्पणी / चीफ जस्टिस बोले- फांसी के खिलाफ अपीलों का एक छोर पर अंत जरूरी, दोषी को कभी नहीं लगना चाहिए इसका सिरा खुला रहेगा


7 लोगों के हत्यारे प्रेमी जोड़े की पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी कीनिर्भया के दोषियों की ओर इशारा कर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- फैसले का सम्मान कर सजा स्वीकारेंDainik Bhaskar Jan 24, 2020, 09:12 AM ISTनई दिल्ली. फांसी की सजा को कानूनी दांव-पेंच में उलझाने पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त टिप्पणी की। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि मृत्युदंड के खिलाफ अपीलों का एक छोर पर अंत जरूरी है। दोषी को कभी नहीं लगना चाहिए कि इसका सिरा खुला रहेगा और सजा को चुनौती देने की लड़ाई अंतहीन चलती रहेगी।फांसी टालने के लिए निर्भया के दोषियों द्वारा कानूनी हथकंडे आजमाने के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह रुख बेहद अहम है। यूपी के अमरोहा में 10 महीने के बच्चे समेत 7 लोगों की हत्या करने वाले प्रेमी जोड़े की मृत्युदंड के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट कानून के अनुसार काम करेगा। पीड़ितों को न्याय देना जजों का कर्तव्य है। कोर्ट को दोषियों ही नहीं, पीड़ितों के अधिकार भी देखने चाहिए। निर्भया के गुनहगारों की ओर इशारा कर कोर्ट ने कहा- ‘‘फैसले का सम्मान कर सजा स्वीकार करनी चाहिए। फांसी को अंतहीन मुकदमों में फंसाने की इजाजत नहीं दे सकते।’’ सभी पक्षों की दलीलें सुनकर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।यह था मामलाडबल एमए कर चुकी शबनम संपन्न परिवार से थी, जबकि उसका पांचवीं पास प्रेमी सलीम दिहाड़ी मजदूर था। परिवार ने रिश्ता मंजूर नहीं किया तो दोनों ने मिलकर 15 अप्रैल 2008 को शबनम के परिवार के 7 लोगों की हत्या कर दी। इनमें एक 10 महीने का बच्चा भी था। ट्रायल कोर्ट ने 2010 में दोनों को मौत की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा। दोनों ने पुनर्विचार याचिका दायर किए बिना तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के समक्ष दया याचिका लगाई थी, जो खारिज हो गई थी। इसके बाद उन्होंने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। गृह मंत्रालय ने भी बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट से दया याचिकाओं को लेकर 2014 में जारी गाइडलाइंस में संशोधन की मांग की थी।दोषी बोले- पहला अपराध था, माफ कर दें; सरकार बोली- मां-बाप का हत्यारा अनाथ होने की दलील नहीं दे सकता


Source: Dainik Bhaskar January 23, 2020 16:31 UTC



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