जिससे होती है हर साल 5 लाख लोगों की मौत उसके खात्मे की दवा विकसित - News Summed Up

जिससे होती है हर साल 5 लाख लोगों की मौत उसके खात्मे की दवा विकसित


जिससे होती है हर साल 5 लाख लोगों की मौत उसके खात्मे की दवा विकसितलंदन, प्रेट्र। शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने मलेरिया के परजीवी प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम के खात्मे के लिए एक नई दवा विकसित की है। मलेरिया एक मच्छर जनित बीमारी है, जिससे पूरे विश्व में एक साल में करीब पांच लाख लोगों की जान जाती है। साइंस जर्नल में प्रकाशित हुए इस अध्ययन में बताया गया कि एक बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन द्वारा विकसित की गई नई दवा ‘टीसीएमडीसी-135051’ मलेरिया के परीजीवी को उसके जीवनचक्र के किसी भी चरण में खत्म कर सकती है।ब्राजील के साओ पाउलो रिसर्च फाउंडेशन (एफएपीईएसपी) के शोधकर्ताओं ने बताया कि यह दवा विशेष रूप से परजीवी के प्रोटीन-पीएफसीएलके3 को प्रभावित करती है। खास बात यह है कि यह दवा मानव शरीर के प्रोटीन को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि पीएफसीएलके3 प्रोटीन उन अन्य प्रोटीनों के उत्पादन को नियंत्रित करता है जो मलेरिया के परीजीवी को जीवित रहने में विशेष भूमिका निभाते हैं। इस प्रोटीन को ब्लॉक करने के बाद परजीवी प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम को भी मारा जा सकता है।‘टीसीएमडीसी-135051’ का चयनअध्ययन के अनुसार पीएफसीएलके3 प्रोटीन को प्रभावित करके परजीवी के विकास के चरणों को न केवल शरीर में मौजूद होने के दौरान प्रभावित किया जा सकता है, बल्कि जब यह मच्छरों से होते हुए दूसरे व्यक्ति को पहुंचने वाला होता है तब भी उसे रोका जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पीएफसीएलके3 प्रोटीन को निष्क्रिय करने वाले नए यौगिक की खोज के लिए बड़े पैमाने पर रासायनिक यौगिकों का विश्लेषण किया।इस प्रक्रिया के तहत उन्होंने 25000 यौगिकों का विश्लेषण किया और ‘टीसीएमडीसी-135051’ का चयन किया। इस दवा में परीजीवी के प्रोटीन को प्रभावित करने की सबसे ज्यादा क्षमता दिखी थी। अध्ययन में यह भी पाया गया कि दवाओं का यह यौगिक प्लाज्मोडियम की अन्य प्रजातियों पर भी इतना ही प्रभावी है।मानव शरीर पर नहीं होता दुष्प्रभावअपने अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया कि ‘टीसीएमडीसी-135051’ परजीवी के प्रोटीन के साथ कहीं मानव शरीर के प्रोटीन को भी तो नहीं प्रभावित करता, लेकिन अपने परीक्षण में उन्होंने पाया कि यह मानव शरीर के लिए बिल्कुल भी हानिकारक नहीं है। शोधकर्ताओं ने बताया कि परजीवी के प्रोटीन पीएफसीएलके3 की तरह ही मनुष्य का प्रोटीन पीआरपीएफ4बी होता है। इससे यौगिक द्वारा इस प्रोटीन को प्रभावित करने का संशय बना हुआ था।अभी और परीक्षण बाकीब्रिटेन की ग्लास्गो यूनिवर्सिटी से इस अध्ययन के प्रमुख लेखक एंड्रयू टोबिन ने बताया कि अभी दवा को अधिक सुरक्षित और प्रभावित बनाने के लिए तीन से पांच साल और लगेंगे। इसके बाद यह मनुष्यों के लिए तैयार हो जाएगी।चूहों पर किया गया प्रयोगब्राजील की कैंपिनास यूनिवर्सिटी से इस अध्ययन के सह लेखक पॉलो गोडाई ने बताया कि इस नई दवा का चूहों पर सफल प्रयोग भी किया गया है। प्लाज्मोडियम बर्घी से संक्रमित चूहों को जब यह यौगिक दिया गया तो मात्र पांच दिनों के भीतर चूहे संक्रमण मुक्त हो गए।यह भी पढ़ें:Malaria outbreak : बरेली मंडल में पाए गए उत्तर प्रदेश के 73 फीसद मरीज, करीब 75 हजार लोगों में मलेरिया की पुष्टि Bareilly Newsदरवाजे के बाहर सिट्रोनेला के पौधे लगाकर पाएं मच्छरों से छुटकारा, डेंगू व मलेरिया से मिलेगी राहतPosted By: Sanjay Pokhriyalअब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप


Source: Dainik Jagran October 10, 2019 05:22 UTC



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