क्रेडिट स्कोर के हिसाब से तय हो रही है आपके लोन की ब्याज दर - News Summed Up

क्रेडिट स्कोर के हिसाब से तय हो रही है आपके लोन की ब्याज दर


हाइलाइट्स अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों की तरफ से ब्याज दरों पर मोलभाव की शुरुआत हो सकती हैलोन अप्रूवल के वक्त न सिर्फ क्रेडिट स्कोर अहम होगा बल्कि इसका फायदा लोन की पूरी अवधि के दौरान मिलेगाएक साल के बाद कर्ज लेने वाला अपने क्रेडिट स्कोर में सुधार करता है तो वह ब्याज दर कम करवा सकता हैईएमआई पेमेंट में 30 दिनों से अधिक की देरी करता है तो उससे भी उसकी क्रेडिट प्रोफाइल खराब हो सकती हैबैंक ऑफ बड़ौदा, सिंडिकेट बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अपने प्राइम और सब-प्राइम ग्राहकों को छांटना शुरू कर दिया है। कर्ज देने की नई व्यवस्था में वे इनसे अलग-अलग ब्याज दरें वसूलेंगे। ये बैंक इनकी छंटाई क्रेडिट स्कोर के आधार पर कर रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा 760 से अधिक क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों से 675-724 क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों की तुलना में एक प्रतिशत कम ब्याज लेगा।बैंक ऑफ बड़ौदा के जिन ग्राहकों का क्रेडिट स्कोर 675 से 724 के बीच हैं, उनसे होम लोन पर बैंक 9.10 प्रतिशत ब्याज लेगा, जबकि 760 से अधिक क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों से 8.1 प्रतिशत का ब्याज लिया जाएगा। इससे अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों की तरफ से ब्याज दरों पर मोलभाव की शुरुआत हो सकती है।भरतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को लोन से जुड़े जोखिम के आधार पर ब्याज तय करने की आजादी दी है। इसमें वे कर्ज पर एक्सटर्नल बेंचमार्क से कुछ प्रतिशत अधिक ब्याज ले पाएंगे। माना जा रहा है कि इससे कर्ज की ब्याज दरों में क्रेडिट स्कोर की भूमिका बढ़ेगी। 1 अक्टूबर से बैंक नए फ्लोटिंग रेट रिटेल लोन के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्क को अपना चुके हैं। रिजर्व बैंक ने इस साल सितंबर महीने में एक आदेश में इसे बैंकों के लिए अनिवार्य बना दिया था। ऐसे में लोन अप्रूवल के वक्त न सिर्फ कर्ज लेने वाले का क्रेडिट स्कोर अहम हो जाएगा बल्कि इसका फायदा लोन की पूरी अवधि के दौरान मिलेगा।मिसाल के लिए, अगर 50 लाख के होम लोन पर ब्याज दर 9.1 प्रतिशत सालाना है तो इसमें एक प्रतिशत की कमी से 3,380 रुपये की इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट (ईएमआई) बचेगी और 25 साल की अवधि में ब्याज 10 लाख रुपये कम हो जाएगा। बैंक ऑफ बड़ौदा में मॉर्गेज और अदर रिटेल ऐसेट्स के हेड वीरेंद्र सेठी ने बताया, ‘अगर एक साल के बाद कर्ज लेने वाला अपने क्रेडिट स्कोर में सुधार करता है तो वह ब्याज दर कम करवा सकता है। वहीं, कर्ज लेने के बाद अगर उसका क्रेडिट स्कोर 760 से नीचे चला जाता है तो उसके लिए ब्याज दर बढ़ जाएगी।’सिंडिकेट बैंक ने भी क्रेडिट स्कोर में 50 अंकों की गिरावट आने पर क्रेडिट रिस्क प्रीमियम बढ़ाने का फैसला किया है। बैंक के एमडी और सीईओ मृत्युंजय महापात्रा ने बताया, ‘कर्ज लेने वाला व्यक्ति अगर पिछले एक साल में तीन बार ईएमआई पेमेंट में 30 दिनों से अधिक की देरी करता है तो उससे भी उसकी क्रेडिट प्रोफाइल खराब हो सकती है।’यूनियन बैंक 700 से कम क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों से 0.10 प्रतिशत अधिक ब्याज लेगा। भारत में सिबिल, इक्विफैक्स, एक्सपीरियन और CRIF हाईमार्क लोगों के क्रेडिट स्कोर तय करती हैं। इससे किसी भी शख्स के कर्ज लेने की योग्यता का पता चलता है। क्रेडिट स्कोर, बैंकों और बॉरोअर्स रिपेमेंट और यूटिलिटी बिल पेमेंट ट्रैक रिकॉर्ड से मिले डेटा के आधार पर तैयार किया जाता है। सिबिल 300 से 900 के बीच क्रेडिट स्कोर देता है। इसमें 900 से स्कोर का मतलब कर्ज लेने की सर्वोच्च योग्यता है, जबकि 300 स्कोर होने का मतलब है कि संबंधित शख्स लोन लेने की योग्यता नहीं रखता।


Source: Navbharat Times October 10, 2019 07:41 UTC



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