कोर्ट से सजा पाए सज्जन कुमार देशभर में बढ़ाते रहेंगे राहुल की मुश्किलें, जानिये- कैसेनई दिल्ली, जेएनएन। कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को दिल्ली हाई कोर्ट ने 1984 सिख दंगों के एक मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सज्जन कुमार पर सिख दंगों में अभी तीन और गंभीर केस की जांच स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) कर रही है और फिलहाल अंतिम चरण में है। इन तीन केस में भी हत्या, हत्या की कोशिश, दंगे भड़काने और पुलिस स्टेशन जलाने जैसे गंभीर मामले हैं।ऐसे में माना जा रहा है कि 2019 लोकसभा चुनाव, 2019 में ही हरियाणा विधानसभा चुनाव फिर 2020 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी सिख दंगों का मामला कांग्रेस के खिलाफ जोरदार तरीके से उठेगा। राजनीति के जानकारों की मानें तो सजा पाने के बाद भी तीन और मामलों के जरिये सज्जन कुमार कांग्रेस अध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ाते रहेंगे, क्योंकि अगले दो साल के दौरान लोकसभा चुनाव के साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।दिल्ली में खड़ी हो रही प्रदेश कांग्रेस फिर लड़खड़ाईपिछले करीब चार साल से दिल्ली की सत्ता से बाहर चल रही प्रदेश कांग्रेस अभी अपने पैरों पर खड़े होना शुरू ही हुई थी कि फिर लड़खड़ा गई। प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता सज्जन कुमार के खिलाफ हाई कोर्ट के फैसले से सकते में हैं। आलम यह है कि चुप्पी साधने के अलावा किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा।दिल्ली कांग्रेस में सज्जन की थी अच्छी पकड़पूर्व सांसद सज्जन कुमार कांग्रेस की प्रदेश इकाई के साथ ही दिल्ली की राजनीति में भी अच्छी पैठ रखते आए हैं। 1984 के सिख विरोधी दंगों में छवि खराब होने से भले पार्टी ने 2009 में सज्जन की टिकट पर कैंची चला दी, लेकिन वह अपने भाई रमेश कुमार को टिकट दिलाने में सफल रहे।बेटे के राजनीतिक संकट पर भी लगा ग्रहण2019 के लोकसभा चुनाव में इसी सीट के लिए वह अपने बेटे जगप्रवेश कुमार की दावेदारी ठोक रहे थे। लेकिन, सोमवार को आए हाई कोर्ट के फैसले से अब प्रदेश कांग्रेस की ही नहीं, दिल्ली की सियासत में भी बदलाव आने की संभावना है। प्रदेश कांग्रेस के तमाम प्रमुख नेता और कार्यकर्ता सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा मिलने से सकते में हैं। दिन भर सभी ने चुप्पी साधे रखी। इससे निकलने की राह भी फिलहाल समझ नहीं आ रही हैं। सिखों के घाव फिर से हरे हो गए हैं, जिसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।सूत्रों के मुताबिक इस झटके से पार्टी को उबरने में वक्त लगेगा। सिखों को साथ लेने के लिए पार्टी को कुछ सख्त निर्णय भी लेने पड़ सकते हैं। जगप्रवेश कुमार के राजनीति में प्रवेश को लेकर भी अभी तस्वीर साफ नहीं है। दूसरी तरफ परदे के पीछे दिल्ली में कांग्रेस और आप के बीच लोकसभा चुनाव के मददेनजर जिस गठबंधन की चर्चा थी, उस पर विराम लगने के कयास लगाए जा रहे हैं। ऐसे में इस सारी स्थिति का फायदा भाजपा को मिलने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।इन तीन मामलों से बढ़ेगी मुश्किल1984 के सिख दंगा मामलों में जिन 3 और महत्वपूर्ण मामलों में सज्जन कुमार के खिलाफ एसआइटी जांच कर रही है। इन तीन केस में सज्जन कुमार पर हत्या, हत्या की कोशिश और दंगे भड़काने समेत 3 पुलिस स्टेशन जनकपुरी, विकासपुरी और सरस्वती विहार को जलाने के आरोपों की जांच एसआइटी आखिरी चरण में कर रही है। बता दें कि स्पेशल जांच टीम का गठन केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा किया गया है।Posted By: JP Yadav
Source: Dainik Jagran December 18, 2018 05:37 UTC