Dainik Bhaskar Jun 02, 2019, 08:01 PM ISTपर्वतारोहियों ने 13 मई को चढ़ाई शुरू की थी; इन्हें 26 को लौटना था, लेकिन 31 तक वापस नहीं आए27 मई को नंदा देवी की पहाड़ियों पर हिमस्खलन हुआ, इसके बाद दल का संपर्क टूट गयाअधिकारियों के मुताबिक, दो अलग-अलग दलों ने नंदा देवी की चढ़ाई शुरू की थी8 लापता पर्वतारोहियों में 4 ब्रिटिश, 2 अमेरिकी, एक ऑस्ट्रेलियाई और एक भारतीयनई दिल्ली/देहरादून. नंदा देवी की चोटी पर चढ़ाई के लिए गए 12 पर्वतारोहियों में से 4 ब्रिटिश नागरिकों को बचा लिया गया है। 8 की तलाश अभी जारी है। पर्वतारोहियों के दो दलों ने 13 मई को चढ़ाई शुरू की थी। यह दल 26 मई तक संपर्क में थे, लेकिन 27 मई को हिमस्खलन के बाद संपर्क टूट गया।नंदादेवी की 7826 मीटर ऊंची पहाड़ियों पर बचाव दल ने रविवार सुबह 4 ब्रिटिश पर्वतारोहियों को देखा। इसके बाद इन्हें एयरलिफ्ट कर लिया गया। दो दिनों से बचाव अभियान जारी है। हालांकि, शनिवार को खराब मौसम की वजह से इसमें रुकावट आ गई थी।लापता पर्वतारोहियों का कोई निशान नहीं मिलाअभी 4 ब्रिटिश, 2 अमेरिकी, एक ऑस्ट्रिलियाई और एक भारतीय पर्वतारोही की तलाश जारी है। इन लोगों ने दुनिया की 23वीं सबसे ऊंची पहाड़ी चोटी की चढ़ाई शुरू की थी। पिथौरागढ़ प्रशासन के अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि पहला हेलिकॉप्टर बचाव अभियान पूरा हो गया है। हमें खाली टेंट दिखाई पड़े मगर इंसानों की मौजूदगी का कोई निशान नहीं मिला। लापता पर्वतारोहियों को बचाए जाने की संभावनाएं बेहद कम हैं।नंदा देवी पर दुर्घटनाओं की दर एवरेस्ट से 5 गुना ज्यादाउत्तराखंड स्टेट डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ) की अधिकारी तृप्ति भट्ट ने कहा कि 15 लोगों की एक टीम बचाए गए पर्वतारोहियों को नीचे लाने के लिए भेजी गई है। उन्होंने कहा कि माउंट एवरेस्ट के मुकाबले नंदा देवी पर दुर्घटनाओं की दर पांच गुना ज्यादा है। नंदा देवी भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है।बेस कैम्प में ही फंस गए थे बचाए गए पर्वतारोहीपिथौरागढ़ पुलिस चीफ आरसी राजगुरु ने कहा- बचाए गए पर्वतारोही बड़े दल का हिस्सा नहीं थे। यह अलग पर्वतारोहण कर रहे थे। यह हिमस्खलन से पहले तक संपर्क में थे। भारी बर्फबारी और खराब मौसम के चलते यह बेस कैम्प में ही फंस गए थे। अभी तक उन पर्वतारोहियों की सुरक्षा के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है, जिन्होंने 13 मई को चढ़ाई शुरू की थी।दो बार नंदा देवी पर चढ़ाई कर चुका ब्रिटिश पर्वतारोही था दल का अगुआब्रिटिश पर्वतारोही मार्टिन मोरान दल का नेतृत्व कर रहे थे। वे पहले भी दो बार इस चोटी पर चढ़ाई कर चुके थे। हालांकि, हालिया अभियान की शुरुआत से पहले उन्होंने फेसबुक पोस्ट में इस बात के संकेत दिए थे कि उनका दल इस बार किसी ऐसी चोटी पर जा रहा है, जहां पहले कोई नहीं गया। इस दल को 26 मई तक मुंसियारी स्थित बेस कैम्प में आ जाना था, लेकिन बेस कैम्प में रह रहे पोर्टर ने बताया कि यह दल 31 मई तक वापस नहीं लौटा। नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश उच्चायोग उत्तराखंड के अधिकारियों के संपर्क में है।
Source: Dainik Bhaskar June 02, 2019 14:25 UTC