अहमदाबाद / मेट्रो कोर्ट में पत्नी की अर्जी: पति संतान देने के काबिल नहीं, तलाक चाहिए - News Summed Up

अहमदाबाद / मेट्रो कोर्ट में पत्नी की अर्जी: पति संतान देने के काबिल नहीं, तलाक चाहिए


पति का स्पर्म काउंट कमदहेज के नाम पर भी प्रताड़नाअगली सुनवाई 7 सितम्बर कोDainik Bhaskar Jul 02, 2019, 04:27 PM ISTअहमदाबाद. शहर में रहने वाली एक विवाहिता ने शादी के 10 साल बाद मेट्रो कोर्ट में फरियाद की है कि उसके पति संतान पैदा करने में सक्षम नहीं है। वे मुझ पर अत्याचार भी करते हैं, अत: मुझे उनसे तलाक चाहिए। कोर्ट में वकील ने भी कहा कि फरियादी के पति के स्पर्म काउंट अपेक्षाकृत कम हैं।पति ने स्वीकारा, स्पर्म काउंट कममहिला की फरियाद के बाद पति ने कोर्ट में यह स्वीकार किया कि उसका स्पर्म काउंट है। दूसरी ओर महिला ने दहेज के नाम जो आरोप लगाया है, वह बेबुनियाद है। महिला द्वारा की गई भरण-पोषण की अर्जी को खारिज कर दिया जाए।शादी के एक महीने बाद ही अत्याचाररमीला ने बताया कि 2008 में उसकी शादी राकेश से हुई थी। शादी के एक महीने बाद ही राकेश ने उससे रुपयों की मांग की। तब उसने उसे 20 हजार रुपए दिए थे। कुछ समय बाद उसने मुझसे अपने पिता से गाड़ी लाने की मांग की। मेरे इंकार पर पति राकेश, सास, ननद मुझे ताने देने लगे।ससुराल वालों ने मुझे बांझ करार दियाशादी के बाद जब मैं मां नहीं बन पाई, तो ससुराल वाले मुझे बांझ कहने लगे। तब पति राकेश ने अपनी जांच कराई, जिसमें यह पाया गया कि उनका स्पर्म काउंट कम है। जिससे वे संतान देने लायक नहीं हैं। इसके बाद ससुराल में मुझ पर अत्याचार बढ़ गए। मैं एक नौकरी करने लगी, तब पति मेरा वेतन छीन लेते।सिंगापोर में नौकरी कीमेरे माता-पिता ने काफी खर्च के बाद मुझे सिंगापोर मेें नौकरी दिलवाई। वहां मैंने मेहनत कर 5 लाख रुपए जमा किए। एक साल बाद सामाजिक काम से भारत आई, तब पति ने मेरे सारे रुपए छीन लिए। इसके बाद मैं सऊदी अरब में नौकरी करने लगी। तब भी मेरा वेतन राकेश लेने लगे।वकील ने स्वीकारा स्पर्म काउंट कमराकेश की ओर से पैरवी करने वाले वकील संदीप क्रिष्टी ने कोर्ट को बताया कि राकेश के स्पर्म काउंट कम होने के कारण घरेलू हिंसा का मामला नहीं बनता। फरियादी से किसी भी प्रकार की दहेज की मांग नहीं की गई है। महिला खुद ही सिंगापोर और सऊदी अरब नौकरी करती रही है। इससे वह अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है। पति से भरण-पोषण मांगने की उसकी अर्जी को खारिज कर दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 7 सितम्बर रखी गई है।(सभी पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं)


Source: Dainik Bhaskar July 02, 2019 10:52 UTC



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