अमेरिका / कपड़ों की तरह पहना जाने वाला दुनिया का पहला गार्डन, इसमें 22 सब्जियां उगीं - News Summed Up

अमेरिका / कपड़ों की तरह पहना जाने वाला दुनिया का पहला गार्डन, इसमें 22 सब्जियां उगीं


दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और डिजाइनर अरुसिआक गेब्रियलन ने गार्डन तैयार किया हैनमी युक्त कपड़े की परत पर बीजों को चिपकाया, फिर रिसाइकिल यूरिन से सींचा; दो हफ्ते में बीज पौधे बन गएDainik Bhaskar Dec 31, 2019, 03:56 PM ISTकैलिफोर्निया. दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और डिजाइनर अरुसिआक गेब्रियलन ने कपड़ों की तरह पहने जा सकने वाला गार्डन तैयार किया है। इसे दुनिया में अपनी तरह का पहला गार्डन कहा जा रहा है। डिजाइनर अरुसिआक गेब्रियलन कहतीं है, ‘अपना खाना खुद उगाइए।’ गेब्रियलन अब तक 22 से अधिक प्रकार की सब्जियों को उगा चुकी हैं, जो कि कपड़ों के रूप में पहनी गई हैं। इनमें गोभी, गाजर, स्ट्रॉबेरी और मूंगफली तक शामिल हैं। इन सबके पौधे एक साथ उगने पर यह कपड़े को कलरफुल बना देते हैं। इन पौधों को उन्होंने अपने यूरिन से सींचा हैं, जिसकी कुछ लोग आलोचना कर रहे हैं।गेब्रियलन का यह प्रोजेक्‍ट फ्रांस के बॉटनिस्ट पैट्रिक ब्‍लैंक के वर्टिकल गार्डन्‍स से काफी प्रभावित बताया जा रहा है। ब्लैंक ने जगह की कमी के चलते वर्टिकल गार्डन उगाया था। गेब्रियलन ने कपड़े की एक ऐसी परत बनाई जिस पर पौधों के बीज चिपक जाते हैं। नमी युक्त कपड़े की परत दो हफ्ते तक रहने के बाद बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेते हैं। रिसाइकिल यूरिन से मिलने वाली नमी पौधों को बढ़ाने में मदद करती है। फिर इनमें फल आने लगते हैं।फल लगने पर पहनना मुश्किलगेब्रिलियन ने बताया, सब्जियों वाले पौधों के कपड़े पहनना तब मुश्किल हो जाता है, जब फल लगने पर पौधों और कपड़े का वजन बढ़ जाता है। वह मानती हैं कि उनके गार्डन वाले आइडिया से खाद्यान की बढ़ती मांग की पूर्ति नहीं हो सकती है, लेकिन इस बारे में लोगों को सोचने पर मजबूर जरूर किया जा सकता है। गेब्रिलियन इसे भविष्य की तैयारी बताती हैं। जब जमीन में पानी की बेहद कमी हो जाएगी और कुछ भी उगाना आसान नहीं रह जाएगा। तब यह तकनीक काम आएगी। वह मानती हैं कि अपने लिए खुद के शरीर पर सब्जियां पहनना कोई बुरा नहीं है। इसमें ह्यूमन वेस्ट का इस्तेमाल हो जाता है। हालांकि अभी इससे यूरिन की गंध आती है, जो आगे की रिसर्च के बाद दूर हो सकती है।


Source: Dainik Bhaskar December 31, 2019 09:45 UTC



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