लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान में जुटे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने एक और योगी को खड़ा कर दिया है। यह भगवादारी अखिलेश के साथ मंच पर जाते हैं, अखिलेश के पक्ष में नारे लगाते हैं और लोगों को अभिवादन भी करते हैं। तस्वीरों में देखें, अखिलेश और योगी का साथ...अखिलेश यादव चुनाव प्रचार में योगी के हमशक्ल सुरेश ठाकुर को साथ लेकर अयोध्या, गोरखपुर की जनसभा में पहुंचे। मंच पर इनकी ओर इशारा किया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा।अखिलेश ने फैजाबाद में एक जनसभा के दौरान सीएम पर तंज कसते हुए कहा, 'यह योद्धाजी गोरखपुर जा रहे थे, हमने कहा कि क्या करोगे गोरखपुर जाकर, चलो फैजाबाद चलो। अब जो आपके काम नहीं होंगे तो इनकी मदद ले लेना, यह सब काम करा देंगे। हम इनसे निवेदन कर रहे हैं कि गोरखपुर ज्यादा न जाओ, फैजाबाद आते रहना थोड़ा बहुत।''योगी' सुरेश ठाकुर बताते हैंं कि अखिलेश उन्हें समाजवादी योद्धा कहते हैं। सुरेश ठाकुर राजधानी लखनऊ में रहते हैं। उनके पिता सुभाष चंद्र और मां कमला का निधन हो चुका है।अचानक से अखिलेश के साथ दिखना, कैसे? इसके जवाब में सुरेश ठाकुर ने बताया कि हमारा संविधान जला दिया गया, जो बाबा साहब ने सभी के लिए लिखा था। इसने मुझ पर प्रभाव डाला। पहले लूटपाट करने वाले डाकू जंगलों में रहते थे, अब सफेद कपड़े पहनकर खुलेआम डाका डाल रहे हैं।अपनी वेश-भूषा पर सुरेश कहते हैं कि वह ब्रह्मचारी नहीं हैं। गेरुआ वेश भगवान बुद्ध का है, जिन्होंने शांति-स्वतंत्रता और बंधुत्व के लिए प्राचीन काल में धारण किया था। उन्होंने कहा कि किसी की खुशी के लिए वह खुद को बाबा भी कहलवा सकते हैं और डाकू भी।चुनाव हमेशा जीतने के लिए लड़ा जाता है, यह बात कई मायनों में सच है लेकिन देश में कुछ लोग ऐसे भी हुए हैं जो चुनावी दंगल में हारने के लिए ही खड़े होते हैं। इन्हें 'धरती पकड़' के नाम से जाना जाता है। इनमें से कोई मनोरंजन के लिए तो कोई राष्ट्रवाद की भावना फैलाने के उद्देश्य से मैदान में होता है। यहां जानिए प्रमुख पांच 'धरती पकड़' के बारे मेंबरेली के रहनेवाले थे। वार्ड पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ा। जवाहर लाल नेहरू ने विधानसभा टिकट देने की पेशकश की थी, लेकिन काका ने मना कर दिया। जमानत राशि जब्त होने पर वह कहते कि यह देश के फंड में उनका योगदान है।भागलपुर के रहनेवाले हैं। इन्होंने लगभग हर राज्य से चुनाव लड़ा हुआ। इसबार दिल्ली और पटना से लड़ रहे हैं। नामांकन में अपने साथ गधों को ले जाते थे। कहते कि यह दिखाता है कि नेता कैसे लोगों को मूर्ख बनाते हैं।तमिलनाडु का यह शख्स इलेक्शन किंग के नाम से मशहूर है। पद्मराजन अपने नाम गिनेस रेकॉर्ड दर्ज कराना चाहते हैं और वह भी सबसे ज्यादा चुनाव हारने वाले प्रत्याशी के तौर पर। इसबार धर्मपुरी सीट से चुनावी मैदान में।ओडिशा के रहनेवाले हैं। पीवी नरमिम्हा राव, बीजू पटनायक, नवीन पटनायक के खिलाफ लड़े चुनाव। इसबार सुबुधी ने बरहामपुर और अस्का सीट ने नामांकन भरा है।'अडिग' वारणसी के रहनेवाले हैं। यहीं से वह पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। भगवान राम की तरह ड्रेस पहनकर नामांकन करने पहुंचे थे।योगी आदित्यनाथ ने ममता बनर्जी पर साधा निशाना, बोले- UP में मुहर्रम और दुर्गा पू...Xलोकसभा चुनावों से पहले धुर विरोधियों- समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ आने से उत्तर प्रदेश में समीकरणों के प्रभावित होने के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुताबिक यह गठबंधन 23 मई से पहले ही टूट जाएगा। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने यह तंज तक कस डाला कि दोनों दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे पर ही हमला कर बैठेंगे और उनका प्रशासन इसके बाद होने वाली हिंसा से निपटने की तैयारी कर रहा है। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ सेऔरकी बातचीत:गठबंधन 23 मई को नतीजे आने से पहले ही टूट जाएगा और एसपी-बीएसपी काडर एक-दूसरे के खून का प्यासा हो जाएगा। इंतजार करिए और देखिए कि कैसे बुआ (मायावती) और बबुआ (अखिलेश) एक-दूसरे पर हमला करेंगे। मुझे मेरे कानून-व्यवस्था तंत्र को निर्देश देने पड़े हैं कि सतर्क रहें और खूनखराबा रोकें।अखिलेश को साफ करना चाहिए कि आधी-आबादी से उनका क्या मतलब है। क्या मुलायम सिंह आधी-आबादी की श्रेणी में नहीं आते? पहले अखिलेश ने उन्हें पार्टी अध्यक्ष के पद से हटाकर चार्ज ले लिया। अब उन्हें पीएम पद के लिए भी लायक नहीं समझ रहे। वह सार्वजनिक तौर पर यह क्यों नहीं कहते और प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार का नाम क्यों नहीं लेते? किसी भी इंसान में इतनी समझ होनी चाहिए कि पीएम के पास जनता का सपॉर्ट होना चाहिए। आंकड़े उनके साथ होने चाहिए। आप एसपी-बीएसपी से क्या उम्मीद कर सकते हैं जो 37-38 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। बीएसपी की 2014 में कोई सीट नहीं आई थी और इस बार भी कहानी वैसी ही रहेगी। मुलायम सिंह के नेतृत्व में एसपी ने 37 सीटें जीती थीं लेकिन यह आंकड़ा नीचे जाएगा क्योंकि वह कन्नौज, बदायूं और आजमगढ़ हार रहे हैं।मेरा मानना है कि बंगाल भी भारत का हिस्सा है। चुनाव चल रहे हैं और दूसरी पार्टियों के नेताओं की तरह मुझे भी प्रचार करने का अधिकार है। अगर बंगाल सरकार में थोड़ी भी राजनीतिक समझ है तो वे मुझे नहीं रोकेंगे। चुनाव आयोग ने यह गलती एक बार की है। अगर तृणमूल कांग्रेस ने मुझे रोका तो उन्हें नतीजे भुगतने होंगे। लोग उन्हें माकूल जवाब देंगे।बिलकुल नहीं। 23 मई के नतीजे बताएंगे कि सभी हमारे साथ हैं, पूरा गोरखपुर।मोदीजी एक बीजेपी कार्यकर्ता हैं और करोड़ों कार्यकर्ताओं को इस बात पर गर्व है कि एक साधारण कार्यकर्ता को देश-विदेश में इतना प्यार मिल रहा है। मोदीजी हमारे नेता हैं और गोरखपुर में भी चुनाव मोदीजी के नाम पर लड़ा जा रहा है।यह ग्राम पंचायत का चुनाव नहीं है। क्या लोकसभा चुनावों के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे नहीं उठने
Source: Navbharat Times May 16, 2019 03:38 UTC