lok sabha chunav: लोकसभा चुनाव: पटना साहिब में आखिर खामोश क्यों हैं 'शॉटगन' शत्रुघ्न सिन्हा? - lok sabha chunav 2019: why shatrughan sinha is khamosh, failing to gain from bjp’s bihar infighting - News Summed Up

lok sabha chunav: लोकसभा चुनाव: पटना साहिब में आखिर खामोश क्यों हैं 'शॉटगन' शत्रुघ्न सिन्हा? - lok sabha chunav 2019: why shatrughan sinha is khamosh, failing to gain from bjp’s bihar infighting


शाम ढलने के साथ ही लस्सी के कपों को लेकर लड़ाई शुरू हो गई। आप इसके लिए पटना की गर्मी को दोषी ठहरा सकते हैं, लेकिन 6 मई की शाम को जब महागठबंधन के उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब के कंकड़बाग में पार्टी मुख्यालय का उद्घाटन कर रहे थे, तब लस्सी के एक एक्स्ट्रा कप के लिए कांग्रेस के महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं की भिड़ंत से प्रचार अभियान का एक बदरंग चेहरा सामने आ गया।इस पहले मार्च में शहर ऐसी एक और राजनीतिक घटना का गवाह बना था, जब पटना एयरपोर्ट पर बीजेपी के पटना साहिब से उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद और पार्टी के राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा के समर्थकों के बीच सार्वजनिक तौर पर झड़प और हाथापाई हुई थी। इस झड़प ने बीजेपी की राज्यस्तरीय गुटबाजी को भी सबके सामने ला दिया था।पटना साहिब में 19 मई को मतदान है। बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले इस सीट से बिहारी बाबू 'शॉटगन' सिन्हा जीत की हैट्रिक लगाने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि चुनाव से ठीक पहले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए सिन्हा के लिए इस बार मुकाबला इतना आसान नहीं है। कांग्रेस के स्टार प्रचारक सिन्हा ने अपने संसदीय क्षेत्र में काफी देर से प्रचार अभियान किया है।रविशंकर प्रसाद को उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज एक सीनियर बीजेपी कार्यकर्ता ने बताया, 'शत्रुघ्न सिन्हा के पास अच्छा मौका था। उन्हें 6 विधानसभाओं में से सिर्फ तीन- कुम्हरार, दीघा और बख्तियारपुर पर ध्यान देना था, लेकिन वह पूरे देश में चुनाव प्रचार करने में व्यस्त हैं। ऐसे में वह अपनी खुद की सीट नहीं बचा पाएंगे। उन्होंने मई के बाद यहां प्रचार अभियान शुरू किया है, जबकि रविशंकर प्रसाद यहां पहले दिन से लगे हुए हैं।'हालांकि इसमें दो राय नहीं है कि सिन्हा को अभी भी लोग पसंद करते हैं, खासतौर से मध्यम-आयु वर्ग के वोटर। हालांकि पटना साहिब से उनके लंबे समय तक गायब रहने ने कइयों को नाराज करना शुरू कर दिया है। कदम कुआं के नाला रोड निवासी संतोष पांडे कहते हैं, 'हमारा सांसद कहां है? वह अब यहां शायद ही कभी आते हैं और ज्यादातर मौर्या होटल में ही रुकते हैं।' शत्रुघ्न सिन्हा पहले इसी इलाके में रहते थे।हालांकि 72 वर्षीय सिन्हा इन सभी आलोचनाओं को खारिज करते हैं। उन्होंने कहा, 'यह मेरा शहर है। मैं यहीं पैदा हुआ हूं। मुझे यहां के लोगों और यहां की समस्याओं के बारे में पता है। मैं पिछले 10 सालों से पटना साहिब का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं।' 2015 के आंकड़ों के मुताबिक पटना साहिब में करीब 20.5 लाख वोटर हैं, जिसमें 4 लाख से ज्यादा कायस्थ हैं। इसके अलावा लालू यादव को जमानत नहीं मिलने को भावनात्मक मुद्दा बनाए जाने से इस बार यादव वोटर के महगठबंधन के साथ बने रहने की संभावना है। यादव और मुस्लिम मिलाकर इस संसदीय सीट की 31 पर्सेंट वोट बैंक बनता है। इनमें अगर कायस्थ वोटरों को जोड़ दिया जाए तो सिन्हा को अपने विरोधी पर अच्छी खासी बढ़त मिलती है। दूसरे सवर्ण मतदाताओं (4 लाख राजपूत, 2 लाख भूमिहार, ब्राह्मण) के मोदी के पक्ष में वोट डाले जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।


Source: Navbharat Times May 16, 2019 03:33 UTC



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