kashmiri pandit ghar wapsi: गोली लगने के 30 साल बाद 'घर वापसी' पर कश्मीरी पंडित का हुआ शानदार स्वागत - kashmiri pandit returns to valley and restarts business after 30 years of being shot at - News Summed Up

kashmiri pandit ghar wapsi: गोली लगने के 30 साल बाद 'घर वापसी' पर कश्मीरी पंडित का हुआ शानदार स्वागत - kashmiri pandit returns to valley and restarts business after 30 years of being shot at


कश्मीर से पलायन करने के लगभग 30 साल बाद श्रीनगर लौटे 74 साल के कश्मीरी पंडित रोशन लाल मावा ने बुधवार को एक बार फिर अपने बिजनस शुरू किया। उनका यहां मुस्लिम व्यापारियों ने शानदार स्वागत किया। मावा को 30 साल पहले अपने होलसेल प्रॉविजन स्टोर पर गोली मारकर घायल कर दिया गया था जिसके बाद वह यहां से चले गए थे।मावा ने बताया, 'एक युवक ने पिस्तौल से चार गोलियां मुझपर दाग दीं। एक गोली मेरे सिर में लगी। हमला इसी दुकान पर हुआ था। मेरा परिवार मुझे इलाज के लिए दिल्ली लेकर गया और हम वहीं बस गए और मैंने वहां खारी बावली में ड्राइ फ्रूट्स का होलसेल बिजनस स्टार्ट किया।' उन्होंने बताया कि वह दिल्ली में अच्छे से बस गए थे लेकिन उन्होंने वापस लौटने का फैसला किया।1990 के दशक में उग्रवाद के शुरू होने से पहले नंदलाल महाराज किशन नाम की उनकी दुकान काफी अच्छे से चल रही थी। मावा कहते हैं, 'मैं अपना इतिहास भूल चुका हूं और यहां अपने घर के लिए बेहद प्यार के साथ दुकान दोबारा खोलने आया हूं। मुस्लिम दुकानदारों ने न सिर्फ मेरा स्वागत किया बल्कि दस्तरबंदी भी की और मेरे सिर पर पगड़ी बांधी। मेरे बेटे संदीप को भी उतना ही सम्मान दिया गया।'मावा के तीन बच्चे हैं- दो बेटे और एक बेटी। उनका बेटा संदीप J&K रेकन्सायल फ्रंट नाम का NGO चलाते हैं। यह एक सेक्युलर फ्रंट है जो कश्मीरी पंडितों को वापस घर लाना चाहता है। उन्होंने बताया, 'मैंने अपने पिता से वापस लौटकर कश्मीर में बिजनस चलाने की गुजारिश की। परोपकार घर से ही शुरू होता है इसलिए मैंने अपने घर से शुरू किया। मैं 100 से ज्यादा पंडित परिवारों को वापस लाना चाहता हूं।'एक दुकानदार मुख्तार अहमद ने बताया, 'हमें खुशी है कि मावा परिवार वापस आ गया है और हम कश्मीरी पंडितों से अपील करते हैं कि वे अपना बिजनस वापस शुरू करें।' रोशनलाल ने पंडितों से घाटी में लौटने की अपील की है। उनका कहना है कि अब यहां कोई डर नहीं है। संदीप ने बताया कि 2016 में उन्होंने 50 परिवारों को वापस लाने की कोशिश की लेकिन बुरहान वानी की मौत के बाद यह हो नहीं सका। उन्हें उम्मीद है कि उनके पिता के वापस जाने से दूसरे लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।


Source: Navbharat Times May 02, 2019 04:45 UTC



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