appointment: ...तो ये है डॉक्टर के पास चेकअप के लिए जाने का बेस्ट टाइम - this is the best time to visit a doctor new study suggests - News Summed Up

appointment: ...तो ये है डॉक्टर के पास चेकअप के लिए जाने का बेस्ट टाइम - this is the best time to visit a doctor new study suggests


अधिकांश डॉक्टर गलत तरह लेते हैं ब्लड प्रेशर: रिपोर्टXअक्सर ऐसा होता है कि बीमार पड़ने पर हम डॉक्टर से पास तो चले जाते हैं लेकिन डॉक्टर की बतायी दवा लेना नहीं चाहते क्योंकि दवाओं से जुड़ी कई आशंकाएं हमारे मन में होती हैं। ऐसे में अगर आप दवा लेने से पहले ही डॉक्टर से कुछ जरूरी सवाल पूछ लेंगे तो दवा लेना आपके लिए आसान हो जाएगा। लिहाजा अपनी मेडिकेशन के बारे में हर मरीज को ये बातें जरूर जाननी चाहिए...आमतौर पर लोगों के बीच यह धारणा है कि कुछ हॉर्मोन दवाएं ऐसी होती हैं जिनके सेवन से लोगों का वजन बढ़ता है लेकिन जरूरी नहीं है कि हर बार ऐसा ही हो। हालांकि अगर आप उन लोगों में शामिल हैं जिनका वजन बड़ी जल्दी बढ़ जाता है तो आपके लिए नॉन-हॉर्मोनल कॉन्ट्रसेप्टिव जैसे- कॉपर कॉइल एक बेहतर विकल्प होगा। इसके अलावा अपनी लाइफस्टाइल और भोजनइच्छा का ध्यान रखकर और नियमित रूप से एक्सर्साइज कर दवा लेने के बाद भी आप अपना फिगर पहले जैसा मेंटेन रख सकते हैं।दवा लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछ लें कि क्या इन दवाओं के सेवन से आपको नींद आ सकती है क्योंकि अगर आपको काम करने के दौरान गाड़ी चलानी है या भारी मशीनों का इस्तेमाल करना है तो दवाओं को घर पर रहने के दौरान ही लें ताकि किसी तरह का रिस्क न हो। इसके अलावा ऐंटीडिप्रेंसेंट दवाओं का रात में सेवन करना बेहतर रहता है। ऐसा करने से आपको रात में अच्छी नींद आएगी और दिन में झपकी लेने से बच जाएंगे।सभी टैबलेट्स में साइड-इफेक्ट की कुछ न कुछ संभावना जरूर होती है और आपके पेशंट इंफर्मेशन लीफलेट में इसकी जानकारी होती है कि कौन सा साइड-इफेक्ट कॉमन है और कौन सा रेयर। उदाहरण के लिए- अगर ब्लड प्रेशर की दवा शुरू करने के बाद आपको अजीब सी खांसी होने लगे या फिर कलेस्ट्रॉल की गोली लेने के बाद शरीर के किसी हिस्से में दर्द महसूस हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। इसके अलावा दवा में बदलाव या दवा का ब्रैंड बदलने पर भी इस तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।अक्सर लोगों को लगता है कि ऐंटीबायॉटिक्स के सेवन के दौरान ऐल्कॉहॉल बिलकुल नहीं पीना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसे में अपने डॉक्टर से पहले ही पूछ लें कि क्या ऐसा करना सेफ है या नहीं। मेट्रोनिडेजॉल एक ऐसी ऐंटीबायॉटिक है जिसके साथ अगर आप ऐल्कॉहॉल का सेवन करें तो आप बहुत ज्यादा बीमार हो सकते हैं। लिहाजा दवा शुरू करने से पहले ही डॉक्टर से सभी जरूरी बातें पूछ लें।कुछ दवाएं खाली पेट में खायी जाती हैं जबकि कुछ दवाओं का सेवन बिना कुछ खाए नहीं कर सकते जबकि बाकी दवाएं ऐसी होती हैं जिन्हें आप किसी भी तरह से खा सकते हैं कोई फर्क नहीं पड़ता। कुछ दवाएं सुबह के वक्त खायी जाती हैं जबकि कुछ रात में। इन सबके अलग-अलग कारण हैं। ऐसे में दवा खाने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर कंफर्म कर लें कि कौन सी दवा किस समय और किस तरह से खानी है।अक्सर ऐंटीडिप्रेसेंट की गोलियां लेने वालों को कुछ दिन बाद ही बेहतर महसूस होने लगता है और वे सोचते हैं कि अब उन्हें दवा लेने की जरूरत नहीं है लेकिन दवा का कोर्स पूरा करने से पहले अपने मन से अगर दवाओं का सेवन रोक दिया जाए तो मरीज एक बार फिर पहले वाली स्थिति में पहुंच जाता है। लिहाजा एक सप्ताह की ऐंटीबायॉटिक हो या 6 महीने की ऐंटीडिप्रेंसेंट या फिर जीवनभर के लिए ब्लड प्रेशर की दवाएं, इनका सेवन करते वक्त डॉक्टर से जरूर पूछ लें कि आप इन्हें कब तक खा सकते हैं।अमेरिका के फिलाडेल्फिया के अनुसंधानकर्ताओं की एक नई स्टडी में यह बात सामने आयी है कि डॉक्टर के पास जाकर इलाज करवाने का सबसे बेस्ट समय सुबह के 8 बजे का समय है। स्टडी की मानें तो सुबह के वक्त इस बात की संभावना अधिक रहती है कि डॉक्टर मरीज को टेस्ट स्क्रीनिंग करवाने के लिए कहें। तो वहीं, दोपहर के वक्त या फिर शाम में डॉक्टर के पास जाने पर खतरनाक बीमारियों के लिए भी डॉक्टर द्वारा टेस्ट या स्क्रीनिंग लिखने के चांसेज घटते जाते हैं।इस स्टडी में यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिल्वेनिया और जॉन हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ता शामिल थे जिन्होंने 19 हजार 254 महिला मरीजों पर स्टडी की। ये सभी वैसी मरीज थीं जिनमें ब्रेस्ट या कोलोरेक्टल कैंसर होने की आशंका थी और जिन्हें कैंसर स्क्रीनिंग की जरूरत थी। इस रिसर्च का उद्देश्य यह जानना था कि क्या निर्णय लेते वक्त थकान का असर मेडिकल स्क्रीनिंग्स का एक फैक्टर बन सकता है जिसका असर निर्णय लेने में बढ़ते बोझ का एक कारण हो सकता है।इसे सिंपल शब्दों में समझें तो चूंकि जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ता जाता है डॉक्टरों पर मरीजों को चेक करना का बोझ और प्रेशर दोनों बढ़ने लगता है और शायद यही वजह है कि दिन खत्म होते-होते इस बात की आशंका बढ़ जाती है कि डॉक्टर, मरीज को जरूरत होने के बावजूद किसी तरह की अडिशनल स्क्रीनिंग करवाने के लिए न कहें। इस स्टडी में यह बात भी सामने आयी कि डॉक्टरों द्वारा सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने की सलाह सुबह 8 बजे ही दी गई थी जबकी सबसे कम दिन में 11 बजे और फिर शाम में 5 बजे। कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग के नतीजे भी कुछ ऐसे ही थे।decision fatigue यानी निर्णय लेते वक्त थकान महसूस होने का असर दोपहर में या फिर शाम के वक्त डॉक्टर से क्लिनिक अपॉइंटमेंट लेने वाले मरीजों में देखा जाता है। उदाहरण के लिए- इन्फ्लूएंजा वैक्सिनेशन रेट जिसकी शुरुआत सुबह के वक्त 44 प्रतिशत से हुई थी वह दिन खत्म होते-होते 32 प्रतिशत पर आ गया। स्टडी के सबूत और नतीजे इस बात की ओर भी इशारा करते हैं कि दिन खत्म होते वक्त अगर कोई मरीज डॉक्टर के पास जाता है तो डॉक्टर द्वारा अनुचित और गैरजरूरी ऐंटिबायॉटिक प्रिस्क्राइब करने की संभावना अधिक रहती है। साथ ही हॉस्पिटल शिफ्ट खत्म होते वक्त डॉक्टरों और हॉस्पिटल स्टाफ द्वारा सही तरीके से हैंडवॉशिंग भी नहीं की जाती।इस स्टडी में इस बात पर ज्यादा जोर दिया गया कि आखिर निर्णय लेने में थकान का असर डायग्नोस्टिक्स और हेल्थ केयर पर क्या और कैसा होता है।


Source: Navbharat Times May 14, 2019 04:17 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */