Year Ender 2019: इन महिलाओं ने अलग-अलग क्षेत्र में देश को बुलंदियों पर पहुंचाया - News Summed Up

Year Ender 2019: इन महिलाओं ने अलग-अलग क्षेत्र में देश को बुलंदियों पर पहुंचाया


Year Ender 2019: इन महिलाओं ने अलग-अलग क्षेत्र में देश को बुलंदियों पर पहुंचायानई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। यह साल भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में महिलाओं की कुछ ऐतिहासिक उपलब्धियों की बानगी बना तो खेल जगत में भी प्रतिभाओं ने कुछ ऐसी मिसालें पेश कीं कि सुविधाओं के अभाव में भी महज जोश का दामन थामे रखते हुए किस प्रकार रचे जा सकते हैं नए कीर्तिमान।एक ओर जहां आर्थिक मोर्चे और विज्ञान जगत में भी महिलाओं की कार्यकुशलता और बौद्धिकता को सराहा गया तो वहीं दूसरी ओर सिनेमा से जुड़ी शख्सियतों ने भी उपेक्षित, शोषित और उत्पीड़न के शिकार वर्ग के अधिकारों को मुखर स्वर दिए...राजनीतिक पटलइस साल संपन्न हुए 17वीं लोकसभा के चुनावों में सर्वाधिक प्रभावशाली जीत भाजपा की स्मृति ईरानी ने अमेठी संसदीय क्षेत्र से दर्ज कराई। उन्हें कैबिनेट मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और महिला एवं बाल विकास मंत्री का दायित्व सौंपा गया।सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री व नृत्यांगना हेमामालिनी उत्तर प्रदेश की मथुरा संसदीय सीट से दोबारा सांसद चुनी गईं।प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री किरण खेर ने चंडीगढ़ लोकसभा सीट से दोबारा जीत दर्ज की।चर्चित साध्वी प्रज्ञा ने भोपाल से लोकसभा चुनाव जीतकर सुर्खियां बटोरीं।उत्तर प्रदेश की पूर्व मंत्री रहीं रीता बहुगुणा जोशी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से लोकसभा सीट जीती।पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर आठवीं बार संसद में पहुंचीं।उत्तर प्रदेश के रायबरेली संसदीय सीट से कांग्रेस पार्टी की सोनिया गांधी पांचवीं बार संसद पहुंचीं।अपना दल पार्टी की अनुप्रिया पटेल ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की संसदीय सीट पर जीत दर्ज की।उत्तर प्रदेश की फतेहपुर संसदीय सीट पर साध्वी निरंजन ज्योति ने दोबारा जीत हासिल की। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।उत्तर प्रदेश के बदायूं से संघमित्रा मौर्य की जीत भी काफी चर्चित रही।पंजाब की बठिंडा लोकसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर की हैट्रिक जीत भी काफी चर्चित रही। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया।पंजाब के मुख्यमंत्री अर्मंरदर सिंह की पत्नी परनीत कौर पटियाला लोकसभा सीट जीतने में सफल रहीं। उत्तराखंड की टिहरी गढ़वाल सीट से समाजसेविका व भाजपा की माला राज्य लक्ष्मी शाह संसद पहुंचीं।हरियाणा की सिरसा सीट से सुनीता दुग्गल निर्वाचित हुईं। वह हरियाणा से एकमात्र महिला सांसद हैं।महाराष्ट्र की अमरावती सीट से नवनीत कौर राणा निर्दलीय निर्वाचित हुईं।नई दिल्ली से भाजपा की मीनाक्षी लेखी संसद पहुंचीं।महत्वपूर्ण जिम्मेदारीनिर्मला सीतारमण ने भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री का पदभार सुशोभित किया। पूर्व में वह रक्षा मंत्री रह चुकी हैं।नई सोच की मिसालपुणे की यास्मीन जुबेर पीरजादा मुस्लिम महिलाओं में उभरी एक नई सोच का प्रतीक बनीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दाखिल की कि मुस्लिम महिलाओं को भी मस्जिदों में प्रवेश और नमाज पढ़ने की आजादी मिलनी चाहिए। उनके पति जुबेद भी उनके साथ हैं साथ ही वह महिलाओं के लिए अलग से मस्जिद नहीं चाहती हैं।उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव हड़हा की गुड़िया उर्फ पुष्पलता राठौर ने जब विधवा होने पर सोलर मैकेनिक की ट्रेनिंग ली थी तब किसी ने यह सोचा नहीं था कि वह सोलर लाइट, पंखे और चूल्हे का पर्याय बनकर ‘सोलर दीदी’ के नाम से प्रसिद्ध हो जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ में उनकी सराहना कर उन्हें अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। वह ‘उत्तर प्रदेश अवार्ड’, ‘लक्ष्मीवाई वीरता पुरस्कार’ और पूर्व की सपा सरकार द्वारा भी सम्मानित की जा चुकी हैं।मध्य प्रदेश के इंदौर की एक दिव्यांग शिक्षिका चंद्रकांता जेठवानी ने बरसों तक न सिर्फ गरीब बच्चों को पढ़ाया, बल्कि अपने स्कूल के छह मेधावी बच्चों के नाम पर करीब डेढ़ करोड़ रु. की संपत्ति वसीयत में लिख दी। वह दोनों पैरों से लाचार हैं और हड्डियों की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं।छत्तीसगढ़ के रायगढ़ की ‘टॉयलेट मैडम’ कही जाने वाली मोनिका हजारदार को एक अमेरिकी विश्वविद्यालय ने अपनी रिसर्च बुक में जगह दी। स्वच्छ भारत मिशन में उल्लेखनीय काम करने वाली मोनिका को ‘ट्रेंड सेटर’ बताया गया।पश्चिम बंगाल के एक चाय बागान में काम करने वालों की बेटियों ने रग्बी खेल (फुटबाल की तरह) सीखकर न केवल नेशनल टीम में जगह बनाई, बल्कि उन्हें आइकॉन ऑफ नार्थ बंगाल’ अवार्ड से भी नवाजा गया। इनके नाम हैं संध्या राव, रुश्मिता, आशा, सुमन, स्वप्ना, चंदा, रीमा, पूनम एवं लक्ष्मी आदि। इनमें से कुछेक को स्कॉलरशिप देकर कोलकाता में पढ़ाया भी जा रहा है।बरेली की रितिका अग्रवाल ने अपने दिव्यांग (मूक बधिर) माता-पिता से मूक संवाद करते हुए न केवल उनसे संकेत लिपि सीखी, बल्कि वह ऐसे बच्चों को स्कूल में जाकर पढ़ाने भी लगीं, जबकि वह बेहद गरीबी में पली-बढ़ी थीं। मां द्वारा बनाए खिलौने बेचकर उन्होंने घर का खर्च चलाया और अपनी व भाई की पढ़ाई भी जारी रखी।बिहार के सेमरी गांव की हेमंती देवी सिर्फ कक्षा पांच पास हैं, पर गांव की गलियों में ढोलक पर गीत गाकर लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करती रहीं। इसके बलबूते अब वह लोहिया स्वच्छ ग्राम मिशन की राष्ट्रीय आइकॉन बनकर स्वच्छता का संदेश देती दिख रही हैं। उनको दूरदर्शन के शो ‘सफर मंजिलों का’ में भी शामिल किया गया।उत्तर प्रदेश की रहने वाली शिप्रा पाठक अकेले ही मध्य प्रदेश की नर्मदा नदी की परिक्रमा के लिए निकल पड़ीं। तीन हजार किमी. का सफर तय कर चुकीं वह लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं। उन्होंने इसे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की शिक्षा बताया। वह पेशे से बिजनेस वुमन हैं।अजमेर में एक महिला भिखारी नंदिनी शर्मा के बैंक खाते से छह लाख से अधिक रुपए पुलवामा आतंकी हमले में शहीद जवानों के परिवारों को दिए गए। पिछले साल उनका निधन हो गया था। उन्होंने बैंक को लिखी एक वसीयत में बताया था क


Source: Dainik Jagran December 30, 2019 08:03 UTC



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