राफेल पर बीजेपी-कांग्रेस के बीच सियासी घमासान जारीX2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले राफेल डील पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने डील की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति ( JPC ) की मांग की है। उधर, बीजेपी का कहना है कि इस तरह की जांच से देश की रक्षा तैयारियां हमारे दुश्मनों और विरोधियों के सामने जाहिर हो जाएंगी। दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस पर बोलना पड़ा है। ऐसे में परिस्थितियां बीजेपी के लिए टेंशन बढ़ा रही हैं।कामकाज के लिहाज से संसद के पिछले कुछ सत्र बेहतर रहे हैं। हालांकि अब कांग्रेस द्वारा JPC की मांग जोर पकड़ने के बाद इसमें एक बार फिर गतिरोध देखने को मिल सकता है। कांग्रेस को दूसरे विपक्षी दलों का भी समर्थन मिल रहा है। आपको बता दें कि साल 2010 में इतिहास का सबसे खराब शीतकालीन सत्र रहा था। उस समय बीजेपी समेत कई विपक्षी दलों ने 2G स्पेक्ट्रम आवंटन पर CAG रिपोर्ट सामने आने के बाद JPC की मांग के लिए काफी हंगामा किया था।दरअसल, JPC का गठन संसद द्वारा विशेष मकसद से किया जाता है और इसकी अवधि भी तय होती है। इसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य शामिल होते हैं। राज्यसभा से लोकसभा के सदस्यों की संख्या दोगुनी होती है। कमिटी इस पर विशेषज्ञों, संघों, सार्वजनिक निकायों या व्यक्तियों से भी परामर्श ले सकती है। JPC अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करने तक काम करती रहती है।अबतक 7 बार जेपीसी का गठन हुआ है। सबसे पहले 1987 में बोफोर्स केस में, हर्षद मेहता कांड 1992 में, केतन पारेख स्टॉक मार्केट स्कैम पर 2001 में, सॉफ्ट ड्रिंक्स में कीटशानक पर 2003 में, 2G स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर 2011 में, अगुस्टावेस्टलैंड डील पर 2013 में और भूमि अधिग्रहण पर 2015 में। खास बात यह है कि इन जेपीसी द्वारा पेश की गई रिपोर्टों को खारिज कर दिया गया या इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।कांग्रेस को जहां राफेल डील के जरिए सरकार पर हमले का अवसर मिल गया है तो वहीं, बीजेपी के सामने भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने की भी चुनौती है। जेपीसी की बढ़ती मांग के बीच बीजेपी उस घटना से बचना चाहेगी जैसा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुआ था। दरअसल, 2011 में उन्हें जेपीसी के समक्ष पेश होने के लिए मजबूर होना पड़ा था। कांग्रेस को इस घटनाक्रम से काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी। अगर प्रधानमंत्री मोदी के सामने भी ऐसी परिस्थिति आती है तो बीजेपी भी खुद को कांग्रेस के स्थान पर पाएगी।
Source: Navbharat Times September 26, 2018 04:06 UTC