भास्कर न्यूज, पिंपरी-चिंचवड़। पुणे और लोनावला शहरों को जोड़ने वाली उपनगरीय (लोकल) रेलवे सेवा को शुरू हुए करीब 47 साल बीत चुके हैं। विडंबना यह है कि इस मार्ग के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए जरूरी तीसरी और चौथी रेल लाइन का विस्तार आज भी केवल कागजों पर ही अटका हुआ है। यात्री संगठन वर्षों से इन नई लाइनों की मांग कर रहे हैं, पर प्रशासनिक उदासीनता के कारण परियोजना को गति नहीं मिल पा रही है। नतीजा यह है कि हजारों यात्रियों का सफर हर दिन देरी और मुश्किलों भरा हो रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए आवश्यक भारी-भरकम बजट का नियोजन प्रशासनिक स्तर पर कर लिया गया है। राज्य सरकार के हिस्से के कुल 2,550 करोड़ रुपए के फंड में स्थानीय निकायों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। इसके अनुसार पुणे मनपा 510 करोड़ रुपये, पिंपरी-चिंचवड मनपा 510 करोड़ रुपये और पीएमआरडीए 765 करोड़ रुपये निधि का यह बंटवारा तय होने के बावजूद प्रत्यक्ष रूप से काम शुरू करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक तत्परता अब तक दिखाई नहीं दी है।- दो लाइनों पर ट्रैफिक का भारी बोझवर्तमान में पुणे-लोनावला मार्ग पर केवल दो रेल लाइनें उपलब्ध हैं। इन्हीं लाइनों पर लंबी दूरी की एक्सप्रेस गाड़ियां, मालगाड़ियां और लोकल ट्रेनें चलती हैं, जिससे यातायात पर भारी दबाव रहता है। अक्सर एक्सप्रेस ट्रेनों को रास्ता देने के लिए लोकल ट्रेनों को स्टेशनों पर रोक दिया जाता है, जिससे नौकरीपेशा लोगों और छात्रों को भारी परेशानी होती है। यदि तीसरी और चौथी लाइन बन जाती है, तो उपनगरीय ट्रेनों के लिए स्वतंत्र मार्ग उपलब्ध होगा और फेरे बढ़ाना भी संभव हो पाएगा। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के हजारों नागरिक इस रेलवे सेवा पर निर्भर हैं। फंड का हिस्सा तय होने के बाद भी परियोजना लटकी रहने से यात्रियों में आक्रोश बढ़ रहा है। अब सवाल यह है कि कागजों पर बनी यह योजना पटरी पर कब उतरेगी? - स्टेशनों का हो रहा विकासपुणे-लोनावला रेल मार्ग पर चिंचवड़, आकुर्डी, देहूरोड, तलेगांव, मलवली जैसे स्टेशनों का भरपूर विकास किया जा रहा है। इन स्टेशनों की सूरत पूरी तरह से बदलने का काम तेजी से चल रहा है। साथ ही अन्य स्टेशनों पर प्लॅटफॉम की लंबाई भी बढाई गई है। मगर ये काम करते समय तीसरी और चौथी लाइन का कहीं पर भी ध्यान नहीं रखा गया है।पिछले कई वर्षों से पुणे-लोनावला रेल मार्ग के यात्री तीसरी और चौथी लाइन का इंतजार कर रहे हैं। कुछ जगहों पर काम शुरू होने का दिखावा किया जाता है, लेकिन हकीकत में ऐसा लग रहा है कि अभी कई सालों तक यात्रियों को केवल निराशा ही हाथ लगने वाली है।- हेमंत टपाले, पूर्व सदस्य, पुणे विभागीय रेलवे सलाहकार समिति
Source: Dainik Bhaskar January 01, 2026 22:06 UTC