श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। Pulwama Terror Attack, पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती हमले में मारे गए आतंकियों में आदिल अहमद डार के अलावा कोई और भी था। जांच टीम की पड़ताल में सुराग सामने आए हैं। इसके अलावा आदिल के अंतिम वीडियो में सामने रखे हथियारों ने भी सुरक्षाबलों की नींद उड़ा दी है। जांच अधिकारी ने बताया कि जिस तरह से यह हमला किया गया, उसे देखते हुए लगता है कि हमलावर पहले इस तरह की कोई कार्रवाई का हिस्सा रहा होगा और पूरी तरह प्रशिक्षित होगा।जो विस्फोटक हमले में प्रयुक्त वाहन में थे और वाहन के शेप चार्जड होने के आधार यही तथ्य सामने आ रहा है। इसलिए आदिल के साथ गाड़ी में कोई दूसरा आत्मघाती होने की संभावना को नहीं नकारा जा सकता। अगर दूसरा आत्मघाती था, तो वह जरूर पाकिस्तानी मूल का रहा होगा। यह हमला जिस तरह से अंजाम दिया गया है उसी तरह का हमला 31 मई, 2017 को अफगानिस्तान के काबुल में हुआ। जिसने यह वाहन तैयार किया होगा, वह जरूर कैमिस्ट्री की अच्छी समझ रखता होगा, उसे विस्फोटक तैयार करने की पूरी जानकारी होगी। जरूर वह एमएससी स्तर का छात्र होगा।वाहन में जिस तरह से विस्फोटक रखे थे, वह टारगेट के साथ टकराने पर दिशा विशेष में ज्यादा नुकसान करने में पूरी तरह समर्थ थे। यही शेप चार्जड वाहन बम की खासियत होती है। गोरीपोरा में जिस तरह आत्मघाती ने सीआरपीएफ की बस को टक्कर मारी है, वह भी इसी तरफ संकेत करती है। जांच अधिकारी ने बताया कि आदिल डार का जो अंतिम वीडियो है,उसमें उसके सामने रखे हथियारों में इपीएम मैगजीन हैं। यह मैगजीन वर्ष 2016-17 के दौरान अफगानिस्तान में स्थित अमेरिकी सेनाओं ने इस्तेमाल करना शुरू की हैं।इनहैंसड परफार्मेंस मैगजीन (ईपीएम) जो नाटो सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाली एमआइ सीरीज की अत्याधुनिक राइफल में प्रयुक्त होते हैं। सामान्य मैगजीन में 14 कारतूस आते हैं। ईपीएम मैगजीन में 30 कारतूस आते हैं। अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिक को पांच मैगजीन दिए जाते हैं। कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को उनके आका एक राइफल के साथ तीन ही मैगजीन प्रदान करते हैं। आदिल के समक्ष आठ से ज्यादा मैगजीन है। एमआइ सीरीज के चार से पांच राइफलें कश्मीर में हो सकती है। उसके पास एनवीडी लेजर गन भी नजर आती है।Posted By: Nancy Bajpai
Source: Dainik Jagran February 17, 2019 03:22 UTC