Priyanka Gandhi: जानिए, कौन हैं प्रियंका गांधी के 'ऑफर' को ठुकराने वाले राजेश मिश्र - varanasi know about rajesh mishra who refuses to become member of priyanka gandhi's advisory council - News Summed Up

Priyanka Gandhi: जानिए, कौन हैं प्रियंका गांधी के 'ऑफर' को ठुकराने वाले राजेश मिश्र - varanasi know about rajesh mishra who refuses to become member of priyanka gandhi's advisory council


राजेश मिश्र (फाइल फोटो)कांग्रेस महासचिव और पूर्वी यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी के सक्रिय होने के साथ ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी (यूपीसीसी) में बड़े पैमाने पर बदलाव किया गया है। दशहरे के एक दिन पहले अजय कुमार लल्लू को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई। वहीं, प्रियंका गांधी को सलाह देने के लिए एक सलाहकार परिषद भी बनाई गई है। इसमें वाराणसी के पूर्व सांसद डॉ. राजेश कुमार मिश्र को भी सदस्य बनाया गया था लेकिन उन्होंने इस जिम्मेदारी को ठुकराते हुए कहा है कि वह सलाहकार परिषद का हिस्सा नहीं होना चाहते और प्रियंका तक उनका संदेश पहुंचा दिया जाए। आइए जानते हैं कौन हैं राजेश मिश्र और क्या रहा है उनका सियासी अतीत:वाराणसी की सियासत में राजेश मिश्र को काफी मृदुभाषी राजनेता माना जाता है। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से छात्र राजनीति के रास्ते सियासत का ककहरा पढ़ा। बीएचयू से दर्शन शास्त्र में एमए और पीएचडी की डिग्री हासिल की। युवाओं के बीच उनका अच्छा क्रेज रहा। यही वजह है कि 80 के दशक में वह बीएचयू छात्रसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।1996 से 2004 तक दो कार्यकाल के लिए वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य रहे। 1999 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के शंकर प्रसाद जायसवाल के खिलाफ कांग्रेस ने उन्हें वाराणसी से अपना उम्मीदवार बनाया। हालांकि इस चुनाव में वह हार गए। 2004 में राजेश मिश्र ने जायसवाल से अपनी हार का बदला ले लिया। लोकसभा चुनाव में उन्होंने एसपी जायसवाल को शिकस्त दी।2009 में लगातार तीसरी बार कांग्रेस ने राजेश मिश्र पर भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट दिया। इस चुनाव में बीजेपी से डॉ. मुरली मनोहर जोशी और बीएसपी से मुख्तार अंसारी मैदान में थे। वहीं, बीजेपी से बगावत करने के बाद अजय राय एसपी के टिकट पर चुनाव में उतरे। माना जाता है कि इस चुनाव में वोटों के ध्रुवीकरण की वजह से राजेश मिश्र खिसककर चौथे नंबर पर चले गए। जोशी को 2 लाख 3 हजार 122, मुख्तार को 1 लाख 85 हजार 911, अजय राय को 1 लाख 23 हजार 874 और राजेश मिश्र को 66 हजार 386 वोट मिले।2014 में बीजेपी के पीएम कैंडिडेट और वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस ने अजय राय पर भरोसा जताते हुए मिश्र का टिकट काट दिया। तीन साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में वाराणसी शहर दक्षिणी विधानसभा सीट काफी चर्चित रही। सात बार के बीजेपी विधायक श्यामदेव रॉय चौधरी उर्फ दादा का टिकट कटने के बाद पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी हो गई थी।नीलकंठ तिवारी को बीजेपी ने मैदान में उतारा और कांग्रेस ने राजेश मिश्र को उनके खिलाफ मौका दिया। पीएम मोदी ने इस चुनाव में वाराणसी में रुककर प्रचार अभियान को धार दी थी और नीलकंठ तिवारी ने राजेश मिश्र को मात दे दी। 2019 के आम चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने राजेश मिश्र को टिकट दिया। हालांकि इस बार उन्हें गृहक्षेत्र देवरिया जिले की सलमेपुर सीट से उतारा गया। लेकिन महज 27 हजार 288 वोटों के साथ उनकी जमानत जब्त हो गई।


Source: Navbharat Times October 10, 2019 06:53 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */