झोले भर यादों की दास्तां'पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं...', कहावत में पूत ही है, लेकिन इसे हर उस व्यक्ति से जोड़ा जा सकता है, जो 'कुछ' कर गुजरने को आतुर है। 22 साल की सारा चौहान, इन्हीं 'कुछ' नहीं, बल्कि 'बहुत कुछ' कर गुजरने की सोचने वालों में से हैं। शुक्रवार की शाम सारा का नाटक था 'इन माई बैग'। यह उन्होंने लिखा है, डायरेक्ट भी किया है और परफॉर्मर भी वह खुद ही हैं। एक बैग को यादों का पिटारा बनाकर उन्होंने यह तो साबित कर दिया कि वह खुद की पहचान कायम कर चुकी हैं, लेकिन जब कहावत का जिक्र किया है, तो बता दें कि सारा संजय चौहान की बेटी हैं, जिन्होंने 'आई एम कलाम' और 'पान सिंह तोमर' जैसी फिल्में लिखी हैं।सारा जिस माहौल में पली-बढ़ी हैं, वह उनकी लेखनी में घुल गया है। कम उम्र में भी लेखन में गंभीरता है, सहजता और सरलता है। सारा का बैग जब खुलता है, तो वह यादों में गोते खाते हुए अपने प्रेम, समाज की रुढ़िवादी सोच और सांप्रदायिक दंगों की विभीषिका तक की थाह ले आती हैं। हालांकि, उनका लेखन कहता है कि इन यादों के समंदर में डूबना नहीं है, पार करना है। ठहरना नहीं है, बढ़ना है। इतिहास दोहराना नहीं है, उससे सीख लेनी है।सारा ने इस नाटक को लिखा है और अकेले परफॉर्म भी किया है। उनकी कहानी एक दिल्ली शहर से मुंबई आई एक अकेली लड़की की कहानी है, जो मीडिया में जॉब करती है। अकेली लड़की को मुंबई में घर मिलने की दिक्कतें और समाज के सवालों पर सारा ने बेहतरीन तरीके से सवाल उठाया है। बैग से निकलने वाली हर उस चीज -लिपस्टिक, डायरी, किताब, हेडफोन- को उन्होंने यादों की माला की तरह बुना है। हालांकि, सारा एकाध जगह बहक गईं, लेकिन उन्होंने बैग खोलकर उन कमियों तो तुरंत दूर कर लिया। 45 मिनट की सोलो परफॉर्मेंस और पहले नाटक में इस तरह की कुछेक गलतियों को नजरअंदाज किया जा सकता है। नाटक के बीच में एक डांस परफॉर्मेंस भी है, जिस पर सारा ने भरपूर तालियां बटोरी हैं।-----------'सारा' हालसारा ने त्रिधा स्कूल से पढ़ाई की है। पॉलिटिकल साइंस से ग्रैजुएट हैं। अंजुम रजबअली, थेस्पो और बैरी जॉन जैसों से उन्होंने लेखन के अनुभव लिए हैं। टाटा लिटरेचर फेस्टिवल से 3 साल जुड़ी रहीं। इसके साथ ही, बुकवाला फाउंडेशन का भी हिस्सा हैं। बच्चों के लिए 2017 में हुए स्टोरी टेलिंग फेस्टिवल को सुपरवाइज किया है।-----------in my bag-----------नोट: अगले हफ्ते के कार्यक्रमों के लिए एक छोटी सी पट्टी छोड़ देना।
Source: Navbharat Times May 06, 2019 03:00 UTC