टी पार्टी पर होता है चयनजस्टिस आरएन पाण्डेय ने पत्र में लिखा है कि हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की चयन प्रक्रिया बंद कमरों में चाय की दावत पर वरिष्ठ न्यायाधीशों की पैरवी व पसंदीदा होने की कसौटी पर की जाती रही है। इस प्रक्रिया में गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है। प्रक्रिया को गुप्त रखने की परंपरा पारदर्शिता के सिद्धांत को झूठा करने जैसी है। न्यायिक चयन आयोग के स्थापित होने से न्यायाधीशों को अपने पारिवारिक सदस्यों की नियुक्ति करने में बाधा आने की संभावना बलवती हो रही थी। सर्वोच्च न्यायालय की इस विषय में अति सक्रियता हम सभी के लिए आंख खोलने वाला प्रकरण सिद्ध होता है।
Source: Navbharat Times July 03, 2019 00:56 UTC