लखनऊ (ब्यूरो)। आजकल क्लाउड किचन का सीन सिर्फ भूख मिटाने तक लिमिटेड नहीं रह गया है, बल्कि ये 'घर वाली वाइब' देने का अल्टीमेट अड्डा भी बन चुके हैं। लखनऊ में पढ़ाई या जॉब के लिए शिफ्ट हुए यंगस्टर्स और प्रोफेशल्स के लिए ये किसी लाइफसेवर से कम नहीं हैं। यहां का खाना न सिर्फ अफॉर्डेबल और टेस्टी होता है, बल्कि इसकी क्वालिटी कई बार इतनी बेहतरीन होती है कि लोग रेस्टोरेंट्स की जगह इनको चुनते हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि बहुत से क्लाउड किचन्स का खाना एकदम क्लीन और हेल्दी होता है, जिसे आप डेली बेझिझक एन्जॉय कर सकते हैं।10 साल में बढ़ा ट्रेंडक्लाउड किचन का ट्रेंड पिछले 10 सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है, खासकर कोविड में लॉकडाउन के बाद से। धीरे-धीरे ये वर्किंग प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स की पसंद बन चुका है। राजधानी में वर्तमान में करीब 10 हजार क्लाउड किचन संचालित हो रहे हैं। इनकी संख्या सबसे ज्यादा यूनिवर्सिटी, कॉलेज, पीजी व हॉस्टल्स के पास वाले इलाकों में होती है। यह कई परिवारों की इनकम का जरिया बन चुका है क्योंकि इन्हें ऑफलाइन और ऑनलाइन, दोनों जगह से काम मिल रहा है। ऑनलाइन फूड डिलिवरी ऐप्स उन्हें ऑर्डर दिलाने में मदद करते हैं जबकि ऑफलाइन ऑर्डर उन्हें आसपास से मिल जाता है।लो कॉस्ट का भी फायदाशहर में चल रहे अधिकतक क्लाउड किचन बहुत सस्ते रेट पर खाना देते हैं, जिसका स्वाद घर जैसा होता है। ऐसे में, जब स्टूडेंट्स और वर्किंग प्रोफेशनल्स को सस्ता और टेस्टी खाना मिलता है तो वे टिफिन पर निर्भर होना बंद कर देते हैं। क्लाउड किचन लोगों के लिए पार्ट टाइम आमदनी का जरिया भी हो गया है। लोग किचन चलाने के साथ-साथ अपने खाना बनाने के शौक को भी पूरा कर रहे हैं। घरेलू महिलाएं भी इससे जुड़कर अपनी इनकम बढ़ा रही हैं।मैं मटियारी के एक हॉस्टल में रहता हूं। यहां के खाने में अक्सर स्वाद नहीं आता है इसलिए पहले मैं होटल से खाना मंगा कर खाता था। पर जबसे क्लाउड किचन का सिस्टम आया है, घर जैसा बना खाना मिलता है और यह जेब पर भारी भी नहीं पड़ता।प्रियांशुमैं पीजी में रहता हूं। पहले टिफिन मंगाकर खाना खाता था। एक बार मेरे दोस्त से क्लाउड किचन से ऑनलाइन खाना मंगाकर खिलाया था। इसके बाद से अब मैं रोज उनके यहां का खाना ही खाता हूं।उत्कर्षघर जैसे खाने की जब भी याद आती है तो क्लाउड किचन से ऑर्डर करके खा लेता हूं। मां के हाथ के स्वाद की थोड़ी कमी पूरी हो जाती है।हर्षऐप से रेटिंग के हिसाब से खाना मंगाता हूं। क्लाउड किचन के अब बहुत सारे ऑप्शन हो गए हैं। कई जगह अच्छा और बुरा, दोनों तरह का अनुभव रहा है।रुद्र प्रताप सिंह
Source: Dainik Jagran April 10, 2026 00:07 UTC