डिजिटल डेस्क,जबलपुर। जून 2025 में सुर्खियों में आया धान परिवहन घोटाला मामले में तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने 16 मिलर्स के खिलाफ जहां एफआईआर दर्ज कराई थी, वहीं 27 के विरुद्ध विभागीय जांच अधिरोपित की गई थी। इस प्रकरण में आठ माह बाद विभागीय जांच उपरांत 13 मिलर्स पर साढ़े बारह लाख रुपए का जुर्माना तय किया गया है।जुर्माना संबंधी प्रस्ताव की फाइल कलेक्टर कार्यालय पहुंच गई है जिस पर अब अंतिम निर्णय कलेक्टर को लिया जाना है। हालांकि अभी 14 मिलर्स पर कार्रवाई होना बाकी है।गौरतलब है कि धान परिवहन मामले में गड़बड़ी की आंशका को लेकर तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा खाद्य विभाग की टीम बनाकर पूरे प्रकरण की जांच कराई गई। इस जांच के दौरान यह उजागर हुआ कि मिलर्स द्वारा जिन वाहनों से धान का परिवहन किया जाना बताया गया था उनके नंबर किसी बड़े वाहन या ट्रक के न होकर, बल्कि मोटर साइकिल और ऑटो के पाए गए जिससे साढ़े चार सौ क्विंटल धान का एक बार में परिवहन संभव ही नहीं है।बताया जाता है कि इस मामले में मिलर्स को स्पष्टीकरण का अवसर भी दिया गया था जिसके चलते मिलर्स संचालकों द्वारा अपने जवाब में यह बताया गया कि जो वाहनों के नंबर डाटा एंट्री में दर्ज किए गए हैं वह ऑपरेटरों के द्वारा दर्ज किए गए है इसमें उनकी गलती नहीं है मगर इस जवाब से प्रशासन ने संतुष्टि जाहिर नहीं की, क्योंकि वाहनों के नंबर दर्ज होने और पास जारी होने तक पूरी जवाबदारी मिलर्स की ही होती है।इस प्रकरण की फाइल उनके पास आई है, जिस पर अवलोकन कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।राघवेंद्र सिंह, कलेक्टरजांच से बचने चलती रही कवायदसूत्र बताते हैं कि इस मामले में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 16 मिलर्स के खिलाफ दर्ज कराई गई और 27 के विरुद्ध विभागीय जांच तय की गई। बताया जाता है कि विभागीय जांच के आदेश होने के बाद भी नान के अधिकारी इस पूरे मामले को लटकाए हुए थे।वे किसी तरह से जांच से बचने की काेशिश करते रहे, क्योंकि कहीं न कहीं उनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही थी। हालांकि जांच करने की आवश्यकता को देखते हुए आखिर आठ माह बाद 13 मिलर्स पर ही साढ़े बारह लाख रुपए का जुर्माना तय हो सका है।
Source: Dainik Bhaskar February 24, 2026 13:33 UTC