डिजिटल डेस्क,जबलपुर। अन्य विभागों की तरह वन विभाग भी कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। आलम यह है कि जबलपुर वन मंडल में लगभग 122 बीटें हैं, जिनमें से करीब 30 से 40 प्रतिशत खाली हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान में तैनात वन रक्षकों की संख्या स्वीकृत पदों के मुकाबले बेहद कम है।कई महत्वपूर्ण बीटों पर एक ही वन रक्षक के पास एक से अधिक बीटों का प्रभार है। सबसे ज्यादा खराब हालात कुंडम रेंज के हैं, जहां कई बीट खाली हैं। जानकारों का कहना है कि वन विभाग में जबलपुर सहित पूरे प्रदेश के वन विभागों में स्टाफ की भारी कमी है।इसमें विशेष रूप से वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) और वनपाल (फॉरेस्टर) के पदों पर सबसे अधिक कमी देखी जा रही है। हैरत की बात है कि इसके बावजूद दो दर्जन से ज्यादा वन रक्षकों एवं वनपालों एवं कर्मचारियों को कार्यालयों में अटैच किया गया है। यानी जिन कंधों पर जंगलों एवं वन्य सम्पदा और वन्य प्राणियों की रक्षा का दायित्व है, वे अधिकारियों की अर्दली कर रहे हैं।कर्मचारियों की कमी एवं अटैचमेंट से व्यवस्थाएं चौपटवन विभाग में नियम विरुद्ध तरीके से अटैचमेंट और अमले की कमी के कारण गश्त (पेट्रोलिंग) प्रभावित होती है, जिससे जंगलों में अवैध कटाई और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर लगाम नहीं लग पा रही है।आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए और जंगली शूकरों के मूवमेंट के दौरान क्विक रिस्पांस टीम के लिए भी पर्याप्त स्टाफ की कमी है। वहीं एक वन रक्षक को अक्सर 2 से 3 बीटों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है, जिससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इस मामले में जब डीएफओ पुनीत सोनकर से बात करने की कोशिश की गई, तो सम्पर्क नहीं हो पाया।
Source: Dainik Bhaskar February 24, 2026 12:33 UTC