खेल से खुशहाली: 18 बरसों में हैंडबॉल ने बदली कई परिवारों की जिंदगीदैनिक भास्कर Jun 23, 2020, 06:47 AM ISTहिसार. (संदीप बिश्नाेई) आज वर्ल्ड हैंडबॉल डे और ओलिंपिक डे है। देश में कहीं भी खेलों का जिक्र होता है तो लोगों की जुबान पर हरियाणा का नाम आना लाजमी है। हरियाणा के खिलाड़ियों ने देश को कई खेलों में मेडल दिलाए हैं। अगर प्रदेश में हैंडबॉल की बात करें तो लाडवा गांव अव्वल है। लाडवा में 2002 में हैंडबाल की शुरुआत हुई थी। यहां से अब तक 8 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय, 70 राष्ट्रीय और 100 से ज्यादा खिलाड़ी राज्यस्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।लाडवा के खिलाड़ियों के लिए हैंडबॉल डे त्योहार से कम नहीं है। गांव के किसान परिवारों से संबंध रखने वाले 20 से ज्यादा खिलाड़ी खेल काेटे से सरकारी नौकरी प्राप्त कर चुके हैं। लाडवा में गांववासी हर वर्ष श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करते हैं।संदीप पूनियां: खिलाड़ियों के लिए राेल माॅडल हैं, दोनों हाथों से करते हैं गोललाडवा के संदीप पूनियां खिलाड़ियाें के लिए राेल माॅडल है। जिन्हाेंने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी बार खेल कर कई पदक हासिल किए हैं। खिलाड़ी संदीप पूनियां दाेनाें हाथाें से गोल करने का हुनर रखते हैं।सुशील कुमार: पिता सफाई कर्मचारी बेटा खेल कोटे से आर्मी में हुआ भर्तीलाडवा के खिलाड़ी सुशील कुमार के घर की स्थिति काफी कमजाेर रही है। पिता सफाई कर्मचारी थे। सुशील कुमार ने 2007 में हैंडबाॅल खेलना शुरू किया। अब हैंडबाॅल काेटे से आर्मी में कार्यरत है।प्रदीप पूनियां: मां ने प्रेरित किया तो मैदान में उतरा, अब सेना मेंपढ़ाई में रुचि कम हाेने के कारण मां ने प्रदीप पूनियां ने हैंडबाॅल खेलने के लिए प्रेरित किया था। राष्ट्रीय खिलाड़ी प्रदीप अाज भारतीय सेना में सेवा दे रहा है।मंदीप पूनियां: पिता की मृत्यु के बाद फुटबाॅल छाेड़ शुरू किया हैंडबाॅलमंदीप पूनिया ने पिता की मृत्यु के बाद 2013 काे फुटबाॅल छाेड़ हैंडबाॅल खेलना शुरू कर दिया था। मंदीप ने बताया ने पिता भी हैंडबाॅल के खिलाड़ी रहे। मंदीप ने भी अपने पिता के राह पर चलना शुरू किया।वर्ष 2002 में हुई थी गांव में हैंडबॉल की शुरुआतलाडवा में हैंडबाॅल की शुरुआत वर्ष 2002 में काेेच जयभगवान पान्नू ने की थी। इसके बाद गांव के खिलाड़ियाें ने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर परचम लहराया है। लाडवा की टीम ने अकेले कई राष्ट्रीय ओपन हैंडबाॅल प्रतियोगिताएं पंजाब, राजस्थान, सिरसा, कलोदा, रेवाड़ी, भिवानी, लालगढ़, भराना(झज्जर), दनोदा (जींद) व अन्य स्थानों पर जीती हैं।ग्रामीणाें के अनुसार गांव में हैंडबाॅल की शुरुआत करने में काेच सतपाल ढांडा, डीपीई रमेश सिहाग, पीटीआई दिलबाग सिंह के अलावा काेच आरएस चहल व डीपीई कुलदीप नैन का अहम याेदगान रहा। अब कोच अशोक पूनियां व कोच महावीर पूनियां प्रशिक्षण दे रहे हैं।इन्होंने रचा हैंडबाॅल में इतिहासलाडवा के संदीप पूनियां, नवीन पूनियां, रवि पूनियां, अमित शर्मा, अजय श्योराण, नवीन पंघाल, खुशबू पूनियां, मोनिका पूनियां ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हैंडबॉल खेलकर न केवल गांव का बल्कि जिले व प्रदेश का नाम रोशन किया है। वहीं 20 खिलाड़ी हैंडबॉल खेल कोटे से सरकारी नौकरियों में अच्छे पदों पर आसीन हैं।संदीप पूनियां साउथ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक, नवीन पूनियां एशियन खेलों साउथ एशियन में रजत पदक जीत चुके हैं। लाडवा की खुशबू पूनियां जूनियर एशियन हैंडबाॅल चैंपियनशिप में भारतीय टीम की कप्तान रह चुकी हँ। अमित शर्मा 3 बार अंतरराष्ट्रीय स्तर खेल चुके हैं।
Source: Dainik Bhaskar June 23, 2020 00:44 UTC