नई दिल्ली, जेएनएन। पाकिस्तानी महिला के पति की याचिका पर गृह मंत्रालय ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में कहा कि भारत सरकार के पास अप्रतिबंधित अधिकार है कि वह किसी विदेशी को बिना कारण बताओ नोटिस दिए देश के बाहर निकाल सकती है, चाहे उसके पास वैध वीजा ही क्यों न हो? गृह मंत्रालय ने मंगलवार को यह जवाब मुख्य न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ के समक्ष हलफनामा दायर करके दिया। सुरक्षा को लेकर मिली रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने उक्त महिला (37) को फरवरी में नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया था। याचिका पर अगली सुनवाई 13 मई को होगी।स्टैंडिंग काउंसल अनुराग अहलूवालिया के माध्यम से दाखिल हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा कि मंत्रालय ने जब एक बार विदेशी को भारत छोड़ने का नोटिस देने का फैसला कर लिया तो उसे वैध वीजा होने के बावजूद देश के अंदर रहने का अधिकार नहीं है। भारत छोड़ने का नोटिस अपने आप में वैध वीजा की आगे की वैधता को समाप्त कर देता है। विदेशी अधिनियम 1946 के तहत सरकार के पास किसी विदेशी को बाहर निकालने का अप्रतिबंधित अधिकार है। सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से महिला के खिलाफ अहम सूचना मिली थी। इसी के आधार पर मंत्रालय ने चुनौती चुनौती याचिका को खारिज करने की अपील की।गौरतलब है कि महिला ने गृह मंत्रालय द्वारा 23 फरवरी तक देश छोड़ने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इस याचिका को एकल पीठ ने 28 फरवरी को खारिज कर दिया था। याचिका के अनुसार भारतीय पुरुष से शादी करने के बाद पाकिस्तानी महिला वर्ष 2005 में भारत आई थी। वह तभी से अपने पति और दो बच्चों के साथ दिल्ली में रह रही है। उसे अधिक समयावधि (लॉन्ग-टर्म) वीजा दिया गया है। यह वीजा जून 2020 तक के लिए वैध है।महिला के पति ने एकल पीठ के फैसले को 12 मार्च को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने अंतरिम राहत देते हुए कहा था कि एकल पीठ ने जिस गोपनीय सुरक्षा रिपोर्ट के अधार पर फैसला लिया था, वह गोपनीय प्रतीत नहीं होती है। अगली तारीख तक महिला के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए।लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप
Source: Dainik Jagran May 08, 2019 02:03 UTC