गोरखपुर: अब तक गोरखपुर में टाउनशिप का विकास मुख्य रूप से गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा किया जाता रहा है। निजी स्तर पर विकसित अधिकांश कालोनियां अवैध थीं, जिनमें सड़क और अन्य सुविधाएं तो दिखती थीं, लेकिन उनका तलपट मानचित्र स्वीकृत नहीं होता था। ऐसे में जमीन खरीदने के बाद लोगों को कानूनी अड़चनों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ता था। जीडीए अब तक 80 से अधिक अवैध कालोनियों पर कार्रवाई कर चुका है और यह अभियान लगातार जारी है।कुल 241 एकड़ में विकासनिजी क्षेत्र की इन तीनों इंटीग्रेटेड टाउनशिप को जीडीए से लाइसेंस मिल चुका है। ओमेक्स की ओर से सोनौली मार्ग पर ताल जहदा के पास करीब 120 एकड़ में टाउनशिप विकसित की जा रही है। वहीं ऐश्प्रा समूह देवरिया बाईपास के पास ताल कंदला क्षेत्र में लगभग 75 एकड़ में परियोजना लाएगा। इसके अलावा जीत एसोसिएट्स रामनगर कड़जहा में करीब 46 एकड़ क्षेत्रफल में इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करेगा। तीनों परियोजनाओं को मिलाकर कुल 241 एकड़ में सुनियोजित विकास होगा।सुरक्षा के पुख्ता इंतजामइन टाउनशिप में आवासीय भवनों के साथ व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी स्थान होगा। स्कूल, अस्पताल, पार्क, हरियाली, चौड़ी सड़कें, नालियां, बिजली और जलापूर्ति की बेहतर व्यवस्था की जाएगी। गेटेड होने के कारण सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी रहेंगे। नियमों के तहत ईडब्ल्यूएस और एलआइजी वर्ग को मिलने वाले फ्लैट या प्लाट भी इन्हीं सुविधाओं से युक्त होंगे। इससे पहली बार कमजोर वर्ग को भी निजी टाउनशिप में सम्मानजनक और सुरक्षित आवास उपलब्ध हो सकेगा।निजी क्षेत्र की तीन आवासीय टाउनशिप के लिए पखवारे भर में संबंधित कंपनियां अपना डीपीआर प्रस्तुत कर देंगी। इन टाउनशिप के आने से एलआइजी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लोगों को भी बड़ी संख्या में आवासीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।अनन्द वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए
Source: Dainik Jagran January 01, 2026 13:12 UTC