Thanks Sreedharan ji for your response on free Metro Bus rides for women. My humble response addressing ur concern… https://t.co/4vrsHXTMJO — Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) 1560514147000महिलाओं को मेट्रो में मुफ्त यात्रा कराने के प्रस्ताव पर 'मेट्रो मैन' ई.श्रीधरन ने नाखुशी जाहिर करते हुए पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी थी और कहा था कि इससे डीएमआरसी को नुकसान झेलना पड़ेगा। वहीं, अब आप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी आशंका को निराधार बताया है। आप ने कहा कि इस सुविधा पर होने वाले खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी।दिल्ली मेट्रो के पूर्व प्रबंधक निदेशक श्रीधरन ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम अपनी चिट्ठी में कहा था कि मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त यात्रा सुविधा देने की जगह सब्सिडी की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खाते में जमा करना चाहिए। इस पर आप के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस बारे में श्रीधरन और दिल्ली सरकार के दृष्टकोण में अंतर है। उन्होंने कहा, ' श्रीधरनजी महिलाओं के लिए मुफ्त मेट्रो बस राइड पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार। हम सभी सुझाओं और आलोचनाओं का स्वागत करते हैं।'सौरभ ने आगे कहा, 'श्रीधरन का विचार है कि दिल्ली मेट्रो में महिलाएं मुफ्त में सफर करेंगी तो इससे डीएमआरसी को नुकसान होगा और उसकी कार्यक्षमता घटेगी। मैं श्रीधरन जी को यह बताना चाहता हूं कि दिल्ली मेट्रो को इसमें एक रुपये का भी नुकसान नहीं होगा।'भारद्वाज ने कहा कि मेट्रो में महिलाओं के किराए का दिल्ली सरकार मेट्रो प्रबंधन को भुगतान करेगी। इसलिए मेट्रो की कार्यक्षमता और यात्रा की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने महिला यात्रियों के किराए की एकमुश्त राशि सीधे बैंक खाते में सरकार द्वारा जमा कराने के श्रीधरन के सुझाव में व्यवहारिक खामियां बताते हुए कहा कि इसका आंकलन करना व्यवहारिक नहीं है कि एक महिला औसतन महीने में कितनी यात्रा करती।श्रीधरन ने 10 जून को पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने कहा था, 'मेट्रो के व्यवस्थित तंत्र को बनाए रखने के लिए 2002 में मेट्रो सेवा शुरू होने के समय ही हमने किसी तरह की सब्सिडी नहीं देने का सैद्धांतिक फैसला किया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इसकी तारीफ की थी। इतना ही नहीं अटलजी ने भी उद्घाटन के समय खुद टिकट खरीदकर मेट्रो यात्रा कर इस बात का संदेश दिया था कि मेट्रो सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ऐसा किया जाना जरूरी है।'उन्होंने यह दलील दी कि सब्सिडी देने की परम्परा से मेट्रो प्रबंधन द्वारा विदेशी एजेंसियों से लिया गया कर्ज चुकाना करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो की इस प्रतिबद्धता का पालन देश के अन्य शहरों की मेट्रो सेवा द्वारा भी किया जा रहा है।
Source: Navbharat Times June 14, 2019 14:32 UTC