दावाटाइम्स फैक्ट चेक के एक पाठक ने हमारे वॉट्सऐप नंबर 8527001433 पर एक विडियो भेजा जिसमें मुस्लिमों की भीड़ रेलवे स्टेशन पर लाठियों और अन्य हथियारों से तोड़फोड़ कर रही है। विडियो के साथ दावा किया गया है कि ये बांग्लादेशी शरणार्थी हैं जो कोलकाता के रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ कर रहे हैं।विडियो के साथ लिखे गए टेक्स्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर इन शरणार्थियों को भारत में नागरिकता दी गई तो इस तरह की हिंसा रोज़ देखने को मिलेगी। पाठक ने हमसे इस विडियो की सच्चाई जानने को कहा।सच क्या है? यह विडियो बांग्लादेश का है और करीब 4 साल पुराना है। जनवरी, 2016 में मदरसा छात्रों के एक समूह ने बांग्लादेश छात्र लीग, मदरसा छात्रों और स्थानीय व्यापारियों के बीच हुई झड़प में अपने एक साथी की मौत के विरोध में ब्राह्मणबारिया जिले में उत्पात मचाया था। यह विडियो तभी का है।कैसे की पड़ताल? विडियो में 0.41 सेकंड पर स्टेशन पर बांग्ला में एक बोर्ड दिख रहा है। बांग्ला भाषा के जानकार हमारे एक साथी की मदद से हमें पता लगा कि स्टेशन का नाम ব্রাহ্মণবাড়িয়া (ब्राह्मणबारिया) लिखा है।इसके बाद हमने गूगल पर ‘ব্রাহ্মণবাড়িয়া Station clash’ कीवर्ड्स सर्च किए और रिजल्ट्स में Daily Sun की 14 जनवरी, 2016 को प्रकाशित रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में जो तस्वीर थी वह अब शेयर किए जा रहे विडियो के विजुअल्स से मेल खाती है।इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे मदरसा छात्रों ने पूरा दिन विरोध प्रदर्शन के दौरान उत्पात मचाया था।इस रिपोर्ट से हिंट लेकर हमने गूगल सर्च पर टाइम फिल्टर को कस्टमाइज कर 10 से 20 जनवरी 2016 किया। इससे हमें YouTube पर 15 जनवरी, 2016 को अपलोड हुआ एक विडियो मिला।विडियो का शीर्षक ‘B-Baria Bangladesh Bramon Baria’ था। यह विडियो अब शेयर किए जा रहे विडियो का थोड़ा लंबा वर्जन था।निष्कर्षटाइम्स फैक्ट चेक ने पाया है कि बांग्लादेश के विडियो को वॉट्सऐप पर कोलकाता में बांग्लादेशी शरणार्थियों का उत्पात बताकर गलत तरीके से शेयर किया जा रहा है।
Source: Navbharat Times December 30, 2019 11:42 UTC