मध्यमवर्ग, गरीब वर्ग मुक्त स्टेशन! इस वायरल तस्वीर के साथ लिखा हुआ है- ये निजी हाथों में सौंप दिए गए पुणे रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म टिकट है। उलट-पुलट के देख लीजिए, देखने का पैसा नहीं लगेगा। खरीदने का लगेगा 2 घंटे का 50 रुपया। मध्यमवर्ग, गरीब वर्ग मुक्त स्टेशन बनना तय। सवाल ये उठता है कि क्या वाकई अडानी ने रेलवे को खरीद लिया है और क्या प्लेटफॉर्म टिकट 10 रुपये से 50 रुपये हो गया है? गलत है ये दावा अडानी का रेलवे को खरीद लेने का दावा पूरी तरह से गलत है। दरअसल, जिस प्लेटफॉर्म टिकट को शेयर किया जा रहै है, उसे पत्रकार प्रशांत कनोजिया ने अगस्त में ट्वीट किया था। उसे किसी ने एडिट किया है और ऊपर की तरफ अडानी रेलवे, रेलवे अब हमारी निजी संपत्ति है लिख दिया है। इस एडिट की गई तस्वीर को ही सोशल मीडिया पर लोग बिना हकीकत जाने शेयर कर रहे हैं।क्या 50 रुपये का है प्लेटफॉर्म टिकट? जी हां, पुणे जंक्शन का प्लेटफॉर्म टिकट 50 रुपये का ही है, उसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन जिस तरह इसे प्रस्तुत किया जा रहा है वजह गलत है। दरअसल, कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए प्लेटफॉर्म टिकट को महंगा किया गया था। खुद रेलवे की तरफ से इसे लेकर एक ट्वीट किया गया था, जिसके जरिए प्रशांत कनोजिया का कनफ्यूजन दूर करने की कोशिश की गई थी।
Source: Navbharat Times December 29, 2020 14:48 UTC