Cannabis use disorder: गंभीर दर्द से राहत पाने के लिए लोग हो रहे हैं भांग के आदी - cannabis use disorder related to adults who have more pain - News Summed Up

Cannabis use disorder: गंभीर दर्द से राहत पाने के लिए लोग हो रहे हैं भांग के आदी - cannabis use disorder related to adults who have more pain


भांग का इस्तेमालसिर्फ नशे के लिए नहीं बल्कि दर्द से मुक्ति के लिए भी दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग भांग का सेवन करते हैं। यह आदत धीरे-धीरे लत में तब्दील हो जाती है और लोग 'कैनाबिस यूज डिसऑर्डर' का शिकार हो जाते हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स इस दिशा में काफी लंबे समय से शोध कर रहे थे कि ऐसे कौन-से फैक्टर्स हैं, जो लोगों को कैनाबिस डिसऑर्डर की तरफ धकेल रहे हैं। साथ ही क्या वजह है कि 2002 से लेकर 2013 के बीच मरिजुआना के सेवन का नॉन मेडिकल इस्तेमाल 9.5 प्रतिशत तक बढ़ा है।हाल ही प्रकाशित रिसर्च में कहा गया है कि भांग और गांजे का नॉन मेडिकल यूज उन लोगों द्वारा अधिक किया जाता है, जो अन्य लोगों की तुलना में अधिक दर्द का अनुभव करते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए 1996 से लेकर अब तक यूनाइटेड स्टेट के 34 शहर भांग और गांजे के मेडिकल यूज को कानूनी रूप से मंजूरी दे चुके हैं। वहीं, 11 राज्य मनोरंजन के लिए एक लिमिट तक भांग के यूज को कानूनी रूप से स्वीकार्यता दे चुके हैं।शोधकर्ताओं ने अपने शोध में शामिल किए लोगों को जब अलग-अलग तरीके से एनालाइज करना शुरू किया तो उन्होंने पाया कि मेडिकल और नॉन मेडिकल रूप से भांग और गांजे का इस्तेमाल करनेवाले ये लोग अन्य लोगों की तुलना में सामान्य से लेकर गंभीर दर्द की परेशानी से अधिक गुजरते हैं। मेडिकल और नॉन मेडिकल रूप से भांग का सेवन करनेवाले इन लोगों में अधिक दर्द का अनुभव करनेवाले लोगों की संख्या 20 प्रतिशत से अधिक रही।शोध में यह बात भी सामने आई कि भांग और गांजे का नॉन मेडिकल यूज भी वे लोग ही अधिक करते हैं, जो अधिक दर्द का अनुभव करते हैं। यही वजह है कि अब 66 प्रतिशत से अधिक लोग दर्द से राहत पाने के लिए भांग और गांजे के उपयोग को बेहतर मानने लगे हैं। रिसर्च के लीड ऑर्थर हसीन के अनुसार, क्योंकि सिर्फ अमेरिका में ही 20 प्रतिशत से अधिक आबादी गंभीर दर्द की परेशानी से गुजरती है इसलिए लोगों के बीच भांग का सेवन लगातार बढ़ने लगा है। कमोवेश यही बात अन्य जगहों के लिए भी लागू होती है।यह शोध अमेरिकन जर्नल ऑफ साइकेट्री में प्रकाशित हुआ। शोध से जुड़े निष्कर्षों के लिए, रिसर्च टीम ने 2001-2002 और 2012-2013 में शराब और मारिजुआना के उपयोग से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण किया। साथ ही नैशनल इपिडर्मियॉलजिक सर्व के डेटा का इस्तेमाल किया गया। इस रिसर्च के लीड ऑर्थर डेबोरा हसीन, कोलंबिया यूनिवर्सिटी के वैगेलॉस कॉलेज ऑफ फिजिशियन ऐंड सर्जन यूनाइटेड स्टेट से असोसिएटेड हैं।


Source: Navbharat Times January 27, 2020 03:55 UTC



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