ताजनगरी में बाबा साहब डॉ। भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती इस बार इतिहास के पन्नों को जीवंत करने वाली है। शाहगंज के ग्यासपुरा में सजने वाली भीम नगरी का मुख्य मंच इस बार सम्राट अशोक के भव्य राजमहल के स्वरूप में नजर आएगा। पचकुइयां स्थित जीआइसी मैदान में इस 'विराट' महल को आकार देने के लिए कोलकाता के 80 से ज्यादा कारीगर दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। आयोजन को पूरी तरह बौद्ध रीति-रिवाजों के साथ 'बोधिसत्व' थीम पर सेट किया गया है, जो न सिर्फ ज्ञान का प्रतीक है बल्कि करुणावश संसार के दुखों को दूर करने वाले प्रबुद्ध प्राणी की राह भी दिखाता है।125 फीट ऊंचा महल और लहराता तिरंगाभीम नगरी का यह महल इंजीनियरिंग और कला का बेजोड़ नमूना होगा। करीब 125 फीट की ऊंचाई और 300 फीट की चौड़ाई वाले इस महल के सबसे ऊपरी शिखर पर देश की शान तिरंगा लहराएगा, जबकि मंच के अन्य शीर्षों पर पंचशील ध्वज की पताकाएं फहराई जाएंगी। समिति के अध्यक्ष सुभाष सागर ने बताया कि 14 अप्रैल की शाम भव्य शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए ग्यासपुरा पहुंचेगी, जिसके बाद 15 से 17 अप्रैल तक जीआइसी मैदान में मुख्य आयोजन होगा। आकर्षक फव्वारे और खास पुष्प सज्जा इस पूरे दरबार की भव्यता में चार चांद लगाने का काम करेंगे।दो लेवल का मंच और 100 जोड़ों की शादीइस बार मंच का डिजाइन भी काफी यूनिक रखा गया है। महामंत्री महेंद्र सिंह के अनुसार, जमीन से 6 फीट ऊंचे इस मंच को दो अलग-अलग चरणों में तैयार किया जा रहा है। मंच के एक लेवल पर उन 100 जोड़ों को बैठाया जाएगा, जो सामूहिक विवाह कार्यक्रम में बौद्ध रीति-नीति के साथ एक-दूसरे का हाथ थामेंगे। इसके ठीक ऊपर मुख्य मंच होगा, जहां अतिथियों और समाज के गणमान्य लोगों की मौजूदगी रहेगी। करीब 200 फीट लंबा और 70 फीट चौड़ा यह मंच अपनी बनावट और लाइटिंग से आगरा वालों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तैयार है।
Source: Dainik Jagran April 09, 2026 01:07 UTC