कमेंट सेक्शन में लोगों ने शख्स को रेल मदद (RailMadad) ऐप का सहारा लेने की बात कही। दरअसल, यह ऐप भारतीय रेलवे का एकीकृत पोर्टल और हेल्पलाइन है, जो यात्रा के दौरान सुरक्षा, चिकित्सा, सफाई, केटरिंग और सामान खोने जैसी समस्याओं के लिए त्वरित समाधान (24 मिनट के भीतर) प्रदान करता है। नोट: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। एनबीटी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।इस पूरी घटना में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात रेलवे स्टाफ का रवैया था। पीड़ित यात्री के मुताबिक, ड्यूटी पर मौजूद TTE ने यह सब देखा, लेकिन उसने उन बिना टिकट वाले यात्रियों को हटाने के लिए कुछ भी नहीं किया। शख्स ने सवाल उठाया कि क्या बाकी लोगों ने भी ध्यान दिया है कि आजकल TTE ऐसी चीजों को लेकर कितने लापरवाह हो गए हैं? 3AC का कंफर्म टिकट होने के बाद भी एक यात्री को पश्चिम एक्सप्रेस में 5 घंटे तक बच्चों को गोद में बिठाकर सफर करना पड़ा। वजह? वेटिंग/बिना टिकट वाले यात्रियों ने 'को-ऑपरेट' करने के नाम पर पूरी सीट और लगेज की जगह घेर ली थी। हद तो तब हो गई जब TTE ने सब देखकर भी कोई एक्शन नहीं लिया।जब यात्री ने उन्हें अपनी जगह से हटने को कहा, तो उनका एक ही रटा-रटाया जवाब था- हम फंसे हुए हैं, थोड़ा को-ऑपरेट कीजिए। इस "को-ऑपरेट" कल्चर की वजह से उस शख्स को अपनी दोनों बच्चियों को पूरे 5 घंटे तक अपनी गोद में बिठाकर सफर करना पड़ा। शख्स ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा- मैंने अपने परिवार के आरामदायक सफर के लिए पैसे दिए थे, लेकिन बिना टिकट या वेटिंग वाले यात्रियों को लगा कि मेरी जगह पर उनका हक है। उन्होंने आगे लिखा- अगर आपके पास टिकट नहीं है, तो जनरल डिब्बे में जाइए। सिर्फ इसलिए कि आपने 'शादी अटेंड की है', आप किसी और का 3AC का आराम नहीं छीन सकते।यात्री ने बताया कि उनकी सीटों के पास 8 लोगों का एक समूह पहले से मौजूद था, जिनके पास कम से कम 25 लगेज थे। जब बातचीत की गई तो पता चला कि उन 8 लोगों में से सिर्फ 2 के पास ही कंफर्म टिकट थी और बाकी लोग बिना कंफर्म टिकट के 'शादी से लौट रहे थे'। उन्होंने अपना सारा सामान सीटों के नीचे ऐसे ठूंस दिया था कि यात्री के खुद के सामान के लिए एक इंच भी जगह नहीं बची थी। यही नहीं, वे लोग बैठने की पूरी जगह भी घेर कर बैठे थे।यह घटना इंडियन रेलवे की पश्चिम एक्सप्रेस ट्रेन की है, जब एक शख्स अपने परिवार के साथ सूरत से दाहोद (करीब 300 किलोमीटर) का सफर कर रहा था। क्योंकि यात्रा केवल 5 घंटे की थी, इसलिए उन्होंने अपनी दो बेटियों के लिए अलग से बर्थ बुक नहीं की थी और सिर्फ पति-पत्नी के लिए 3AC की कंफर्म सीटें ली थीं। इसके लिए उन्होंने 2000 रुपये चुकाए थे। यह कहानी रेडिट पर Exotic-Cut1957 नाम के यूजर ने पोस्ट की।
Source: Navbharat Times February 14, 2026 11:32 UTC