भास्कर संवाददाता। भिंड शहर के श्री दिगंबर जैन चैत्यालय मंदिर में बुधवार को धर्मसभा का आयोजन हुआ। जिसमें आचार्य सुबल सागर महाराज के प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। धर्मसभा में आचार्य ने कहा कि हम सोचते कुछ है और होता कुछ और है,हर. ऐसे ही संसार में सदियों से परिवर्तन होता रहा है। उन्होंने कहा कि यह काया नाशवान है, शरीर भी समय पूर्ण हो जाने पर परिवर्तन की तरह शरीर सब कुछ छोड़कर दूसरी आत्मा में प्रवेश करता है। हजारों वर्ष से हम देख रहे है कि संसार जैसा है वैसा ही रहेगा,पर समय- समय पर यहां पर हर चीज का परिवर्तन होता है, जहां पहले महल हुआ करते थे, वो खंडहर के रूप में परिवर्तन हो गए हैं ,और जहां खंडहर,वीरानी हुआ करती थी। वहां आज सब कुछ नया देखने को मिल रहा है। संसार का यह परिवर्तन चलता है और चलता रहेगा।आचार्य सुबल सागर महाराज ने कहा कि संसार में कुछ भी शाश्वत नहीं है,संसार की चक्की में हम पीस रहे है और कर्मों की चक्की चल रही है। संसार में जीव अकेला आता है और अकेला ही चला जाता है,समता का रस पीता है वह निराला जीवन जीता है,जिनकी महंगे सिंहारों से जीवन घुल जाता है जल काया से मेरा कैसा नाता दिन-रात हमारा शुभ वह अशुभ कर्मों का चलता रहता है, मीडिया प्रभारी विपुल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य सुबल सागर महाराज के सानिध्य में 1 जनवरी की सुबह भगवान आदिनाथ का महामस्तकाभिषेक एवं मंगल प्रवचन का आयोजन होगा।
Source: Dainik Bhaskar December 31, 2025 22:45 UTC