नई दिल्ली, जेएनएन। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से थोड़ी राहत मिली। शीर्ष अदालत ने मारपीट के मामले में आरोपी रिजवी को कोर्ट के समक्ष समर्पण करने के लिए और 15 दिन का समय दे दिया। इस दौरान रिजवी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं की जाएगी।यह आदेश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और संजीव खन्ना की अवकाशकालीन पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल रिजवी की विशेष अनुमति याचिका का निपटारा करते हुए दिया। हाई कोर्ट ने केस रद करने की मांग पर सुनवाई होने तक निचली अदालत से जारी गैर जमानती वारंट पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी थी और अदालत के समक्ष समर्पण करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया था।पीठ ने कहा कि उसे हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई आधार नजर नहीं आता। हालांकि न्यायहित को देखते हुए वह याचिकाकर्ता को अदालत के समक्ष समर्पण करने के लिए 15 दिन का और अतिरिक्त समय देती है।यह मामला लखनऊ की दरगाह हजरत अब्बास में नई कमेटी को प्रबंधन प्रभार सौंपने के दौरान हुई मारपीट और झगड़े का है। घटना 2012 की है। रिजवी व अन्य आरोपितों ने हाई कोर्ट में मुकदमा रद करने की याचिका दाखिल कर रखी है। हाई कोर्ट ने मुकदमा रद करने की मांग लंबित होने के कारण निचली अदालत की सुनवाई पर रोक लगा दी थी जो कि लंबे समय तक जारी रही। अभी हाल में हाई कोर्ट ने निचली अदालत की सुनवाई पर लगी रोक हटा दी थी जिसके बाद निचली अदालत ने रिजवी व अन्य के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एपPosted By: Dhyanendra Singh
Source: Dainik Jagran May 15, 2019 18:00 UTC