लोकसभा चुनाव 2019 न्यूज़: दिल्ली: वोटिंग के ऐन पहले तक खामोश मुसलमान, किसी बड़ी मस्जिद से ‘सियासी ऐलान’ नहीं - delhi muslim mute over voting jama masjid also not done any political announcement - News Summed Up

लोकसभा चुनाव 2019 न्यूज़: दिल्ली: वोटिंग के ऐन पहले तक खामोश मुसलमान, किसी बड़ी मस्जिद से ‘सियासी ऐलान’ नहीं - delhi muslim mute over voting jama masjid also not done any political announcement


क्या सोच रहे दिल्ली के मुस्लिम? रमजान शुरू होने के बाद दिल्ली के मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में चुनाव प्रचार लगभग थम सा गया था। मुसलमान दिनभर रोजा रखते हैं और शाम को इफ्तार और उसके बाद तरावीह की नमाज में मशगूल हो जाते हैं। इस दौरान राजनीति पर चर्चा करने का वक्त आम मुसलमान के पास नहीं था। अब जब रविवार को दिल्ली में वोट पड़ने हैं तो उससे पहले भी दिल्ली के मुस्लिम तबके में एक खामोशी सी छाई है। कांग्रेस, आप और कुछ हद तक बीजेपी भी अपने-अपने दावे कर रही है लेकिन मुस्लिम वोट किधर जा रहा है यह कह पाना अभी मुश्किल है।इस मामले में मुस्लिम उलमा भी खास एहतियात बरत रहे हैं। जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कुछ दिन पहले ही यह ऐलान कर दिया था कि वो इस बार किसी भी राजनीतिक पार्टी के पक्ष या विपक्ष में अपील नहीं करेंगे। अपने इस स्टैंड पर वह कायम रहे क्योंकि शुक्रवार को रमजान के पहले जुमे की नमाज थी और कुछ लोगों को लग रहा था कि शायद कुछ ‘सियासी ऐलान’ हो लेकिन शाही इमाम ने अपने बयान को ऐसी किसी भी बात से दूर रखा।बुखारी ने एनबीटी को बताया कि उन्होंने जुमे के खुतबे में लोगों से वोट करने की भी अपील नहीं की क्योंकि लोग खुद समझदार हैं और लोकतंत्र की मजबूती के लिए जो जरूरी होगा करेंगे। हालांकि दिल्ली की दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद फतेहपुरी के शाही इमाम डॉ. मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम ने जुमे के बयान में लोगों से अपील की कि वे जरूर वोट देने के लिए निकलें। उन्होंने कहा कि हर मुसलमान को सुबह 7 बजे अपने-अपने पोलिंग बूथ पर मौजूद होना चाहिए और बुजुर्गों, औरतों और बीमार लोगों की वोट डालने में मदद भी करनी चाहिए। उन्होंने भी किसी पार्टी के पक्ष में अपील नहीं की लेकिन यह जरूर कहा कि वोट बंटना नहीं चाहिए।भले ही मस्जिदों के अंदर कोई सियासी हलचल न हो लेकिन बाहर जरूर जोरदार बहस चल रही है। खासतौर से तरावीह के नमाज के बाद लोग जरूर छोटे-छोटे गुटों में दिल्ली की राजनीति पर बहस करते हुए नजर आ रहे हैं। फिरोजशाह कोटला किले के मस्जिद के बाहर तरावीह पढ़कर निकले पुरानी दिल्ली के कुछ लोगों से हमने बातचीत की तो उन्होंने बताया कि दिन में तो किसी के पास वक्त नहीं है लेकिन अब नमाज से फारिग होकर हम जरूर इस बात पर चर्चा करते हैं कि वोट किसे दिया जाए। यहां खड़े रहमत अली ने बताया कि मुस्लिम वोट किधर जाएगा कहना मुश्किल है क्योंकि जिस तरह से हम यहां बात करके मन बना रहे हैं वैसे ही पूरी दिल्ली में चल रहा है और वोटिंग के दिन सुबह फज्र की नमाज के बाद तक लोगों के मन बदल सकते हैं।दिल्ली के सात लोकसभा क्षेत्रों में से तीन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या इतनी है कि वह जीत हार तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन तीन सीटों में चांदनी चौक, उत्तर पूर्वी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र शामिल है। उत्तर पूर्वी लोकसभा क्षेत्र में करीब 23 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं, जो कि सभी सात सीटों के मुकाबले ज्यादा है। पूर्वी दिल्ली में 16%, चांदनी चौक 14%, नॉर्थ वेस्ट 10%, दक्षिणी दिल्ली 7%, वेस्ट दिल्ली 6% और नई दिल्ली में 5% मुस्लिम मतदाता हैं।उत्तर पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद, सीलमपुर, घोंडा। चांदनी चौक के बल्लीमारान, मटिया महल और चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी है। 2015 के विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस को वोटर्स माने जाने वाले अल्पसंख्यक, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले और अनिधिकृत कॉलोनियों के लोगों ने आप को वोट किया था और पार्टी ने कुल 70 में से 67 सीटें जीती थीं। हालांकि 2017 के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने आप द्वारा छीने हुए अपने वोट प्रतिशत को कुछ हद तक फिर से वापस हासिल करने में सफलता पाई थी।


Source: Navbharat Times May 11, 2019 02:52 UTC



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