नियम विरूद्ध जारी किए पट्टाें काे निरस्त कराने जिला प्रशासन काे शिकायतदैनिक भास्कर Jun 22, 2020, 06:59 AM ISTबांसवाड़ा. नगर परिषद में जमीन कन्वर्जन के नाम पर बड़े स्तर पर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। जिसमें भूमि मालिक और माफियाओं के साथ मिलीभगत कर मनमर्जी से नियम विरूद्ध पट्टे जारी किए जा रहे हैं। जिससे राजकोष काे बड़ा नुकसान पहुंच रहा है और शहर में सरकारी जमीनों की कमी हाेती जा रही है।एक शिकायत प्रशासन काे समाजसेवी गोपीराम अग्रवाल द्वारा की गई है। जिन्होंने मांग रखी है कि जाे नियम विरूद्ध पट्टे जारी किए गए हैं उन सभी काे निरस्त किया जाए और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों काे खुर्द बुर्द करने की जांच की जानी चाहिए।अग्रवाल ने बताया कि जिला स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हाेता है ताे आगे एसीबी और जयपुर उच्चाधिकारियों तक नगर परिषद के अधिकारियों की शिकायत कर बड़े स्तर पर जांच करवाई जाएगी। अग्रवाल ने शहर के मास्टर प्लान के आधार पर शिकायत में बताया कि राज्य सरकार ने जून 2013 में मास्टर प्लान अनुमोदित किया था। भूमि रुपांतरण अधिकारी के पास 3710 हेक्टेयर अविकसित भूमि थी।भू रुपांतरण अधिकारी काे अविकसित भूमि का 40 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित करना था और 60 फीसदी जमीन के ही पट्टे जारी करने का नियम था। लेकिन नगर परिषद में सालों से मिली भगत का खेल चल रहा है, जिस कारण 100 फीसदी जमीन के पट्टे जारी किए जा रहे हैं।अग्रवाल का कहना है कि यदि 100 फीसदी के ही पट्टे जारी हाेते रहे ताे शहर में सार्वजनिक उपयोग यानि मनाेरंजन, खेल, हाॅस्पिटल, स्कूल, बगीचें, तालाब, नदी नाले, आदि की जगह ही नहीं रहेगी। मास्टर प्लान के तहत बहुत ही जरूरी है।840 हैक्टेयर जमीन काे पहुंचाना है 4550 तकअग्रवाल ने विस्तार से बताया कि मास्टर प्लान 2011 के मुताबिक नगर परिषद क्षेत्र में 840 हैक्टेयर जमीन हैं। जिसे 2031 तक 4550 हैक्टेयर तक ले जाना है। इसमें 332 हैक्टेयर जमीन आवासीय हैं, जिसे बढ़ाकर 2328 करना है। वाणिज्यिक उपयोग की 37 हैक्टेयर जमीन हैं, जिसे 106 हैक्टेयर तक बढ़ाना है, वहीं औद्योगिक उपयोग की 128 हैक्टेयर जमीन काे 202 हैक्टेयर तक विकसित करना है।
Source: Dainik Bhaskar June 22, 2020 01:29 UTC