राज्यसभा में आज वित्त विधेयक, 2026 और विनियोग-संख्या-2 विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सदन में विधेयक पेश किया। इसमें वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की संचित निधि से कुछ राशि का भुगतान और विनियोग अधिकृत करने का प्रावधान है।चर्चा का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा कि सुधारों को ध्यान में रखकर वित्त विधेयक तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि रिफॉर्म एक्सप्रेस ने सरकार को वित्त विधेयक में विभिन्न घटकों को शामिल करने में मार्गदर्शन दिया है। श्रीमती सीतारामन ने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि मुक्त अर्थव्यवस्था से हर वर्ग को लाभ मिले।चर्चा शुरु करते हुए कांग्रेस के शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि कर संरचना में सरकार ने केवल मामूली फेरबदल किया है। उन्होंने कहा कि इस बजट से मध्यम वर्ग को लाभ नहीं होगा। भारतीय जनता पार्टी के संजय सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने जीडीपी-ऋण अनुपात को नियंत्रण में रखने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि आज केंद्र और राज्यों का संयुक्त जीडीपी-ऋण अनुपात 83 प्रतिशत है, जिसे 2030 तक घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2008-09 में राजकोषीय घाटा साढे सात प्रतिशत था, जो अब घटकर चार दशमलव तीन प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के जारी किए गए एक लाख 43 हजार करोड़ रुपये के तेल बांडों का ऋण चुकाने के बाद प्राप्त की है। चर्चा जारी है।इस बीच, लोकसभा ने वित्त विधेयक, 2026 ध्वनि मत से पारित कर दिया है।
Source: NDTV March 27, 2026 13:16 UTC