मधेपुरा ( )। जिले के विभिन्न प्रखंडों में किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण यानी आत्मा के परियाेजना निदेशक राजन बालन ने नायाब तरीका अपनाया है। वे इसके लिए संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों का सहारा लेने के साथ-साथ अपने रूप में भी परिवर्तन कर लेते हैं।किसानों के लिए गेहूं चालीसा और धान चालीसा भी लिख चुके हैंपरियोजना निदेशक के ये बदले रूप किसानों को खूब भा रहा है और वे आसानी से सरकार की कृषि संबंधी नीतियों से अवगत हो जाते हैं। परियोजना निदेशक कभी वर्मी बाबा तो कभी मशरूम बाबा बनकर किसानों को वर्मी कंपोस्ट का उर्वरक के रूप में उपयोग तथा मशरूम की खेती के बारे में किसानों को गाना गाकर इसके गुण के बारे में बताते हैं। किसानों के लिए उन्होंने गेहूं चालीसा, धान चालीसा तथा आलू चालीसा नामक किताब भी लिखा है। जिसमें सभी फसलों की खेती समेत उनसे होने वाले फायदे की जानकारी दी गई है।
Source: Dainik Bhaskar January 07, 2019 11:41 UTC